भीषण गर्मी और लू के कारण आम जनजीवन पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तेज धूप और लू के कारण लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, खासकर स्कूली बच्चों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है। राजधानी दिल्ली में बढ़ते तापमान को देखते हुए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सरकार और स्कूल प्रशासन सतर्क हो गए हैं और कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच अभिभावकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां कब से शुरू होंगी और कितने दिनों तक रहेंगी।
बढ़ती गर्मी और प्रशासन की तैयारी
भीषण गर्मी और लू के कारण आम जनजीवन पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में इसके 44 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। कई जगह हर घंटे वॉटर बेल बजाई जा रही है ताकि बच्चे समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन से बच सकें। गर्मी के बढ़ते असर को देखते हुए कई राज्यों ने अपने स्तर पर फैसले लिए हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा और केरल जैसे राज्यों में पहले ही गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। वहीं कुछ राज्यों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, ताकि बच्चे तेज धूप से बच सकें। सुबह जल्दी स्कूल खोलने का फैसला भी इसी दिशा में एक कदम है।
दिल्ली में छुट्टियों का संभावित कार्यक्रम
दिल्ली के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां आमतौर पर मई के दूसरे सप्ताह से शुरू होती हैं। पिछले शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार 11 मई से छुट्टियां शुरू हुई थीं, इसलिए इस बार भी इसी समय के आसपास हॉलिडे शुरू होने की संभावना है। सरकार जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकती है और पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो दिल्ली में गर्मी की छुट्टियां करीब 50 दिनों तक रहती हैं। पिछले साल स्कूल 11 मई से 30 जून तक बंद रहे थे। इस बार भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल सकता है। हालांकि, स्कूल खुलने से कुछ दिन पहले टीचर्स को बुलाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में समय परिवर्तन और छुट्टियां
उत्तर प्रदेश में भी गर्मी का असर साफ दिख रहा है। गाजियाबाद और लखनऊ जैसे शहरों में स्कूल का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया है। वहीं गर्मी की छुट्टियां 20 मई से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चल सकती हैं। कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्कूलों में छुट्टियों और समय में बदलाव के जरिए बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
बढ़ते तापमान और 44 डिग्री तक पहुंचने के पूर्वानुमान के बीच प्रशासन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। स्कूलों में वॉटर बेल जैसी पहल और समय में बदलाव इसी रणनीति का हिस्सा हैं ताकि लू के प्रकोप से छात्रों को बचाया जा सके।
