ताइवान की सीमा के पास मंडराए 7 चीनी युद्धपोत, रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी

ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के पास 7 चीनी नौसैनिक जहाजों और एक आधिकारिक जहाज की मौजूदगी दर्ज की। मंत्रालय ने स्थिति की निगरानी करते हुए जवाबी कार्रवाई की है।

ताइवान और चीन के बीच जंगी तनाव के हालात लगातार गहराते जा रहे हैं। ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (MND) ने बुधवार को अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास सात चीनी नौसैनिक जहाजों और एक आधिकारिक जहाज का पता लगाया है और रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इन गतिविधियों पर पैनी नजर रखी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक जवाबी कार्रवाई की। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस सैन्य गतिविधि की पुष्टि की है।

रक्षा मंत्रालय की निगरानी और जवाबी कार्रवाई

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि आज ताइवान के आसपास पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 7 जहाज और 1 आधिकारिक जहाज देखे गए। रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC) के सशस्त्र बलों ने पूरी स्थिति पर नजर रखी और उचित जवाबी कार्रवाई की। मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि इस दौरान ताइवान के आसपास पीएलए के किसी भी विमान को उड़ते हुए नहीं देखा गया, इसलिए उड़ान पथ का कोई चित्रांकन (Picturization) जारी नहीं किया गया है।

पिछले 24 घंटों की सैन्य गतिविधियां और घुसपैठ

इससे पहले भी ताइवान ने अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास चीनी नौसेना के छह जहाजों और एक आधिकारिक जहाज की उपस्थिति दर्ज की थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आसपास पीएलए विमानों की 1 उड़ान, प्लान (PLAN) के 6 जहाज और 1 आधिकारिक जहाज देखे गए थे। इनमें से एक विमान ने ताइवान के उत्तरी भाग में स्थित वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश किया था। इन सभी गतिविधियों पर आरओसी सशस्त्र बलों ने निरंतर निगरानी रखी और जवाबी कदम उठाए।

चीन का दावा और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ताइवान पर चीन का दावा एक अत्यंत जटिल मुद्दा है, जिसकी जड़ें ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों में गहराई तक समाई हुई हैं। बीजिंग का आधिकारिक रुख यह है कि ताइवान चीन का एक अभिन्न अंग है। यह दृष्टिकोण चीन की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है और इसे घरेलू कानूनों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बयानों के माध्यम से भी समर्थित किया जाता है और हालांकि, ताइवान अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है और अपनी स्वतंत्र सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था के साथ कार्य करता है। यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के अनुसार, ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बहस का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है, जो संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों की परीक्षा लेती है।

किंग राजवंश और जापानी उपनिवेश का इतिहास

ताइवान पर चीन के दावे का इतिहास 1683 से शुरू होता है, जब किंग राजवंश ने मिंग राजवंश के वफादार कोक्सिंगा को हराकर इस द्वीप का विलय किया था। हालांकि, उस समय ताइवान किंग राजवंश के सीमित नियंत्रण में एक परिधीय क्षेत्र ही बना रहा। इतिहास में एक बड़ा बदलाव 1895 में आया, जब प्रथम चीन-जापान युद्ध में हार के बाद किंग राजवंश ने ताइवान को जापान को सौंप दिया। इसके बाद ताइवान अगले 50 वर्षों तक जापानी उपनिवेश बना रहा। द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद ताइवान को पुनः चीन के नियंत्रण में दिया गया, लेकिन संप्रभुता के इस हस्तांतरण को कभी औपचारिक रूप नहीं दिया जा सका।