अमेरिकी सरकार के एक बड़े फैसले ने वैश्विक तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) सहित आठ प्रमुख टेक कंपनियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन यानी PERM प्रोग्राम पर रोक लगा दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तुरंत बाद TCS का आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसमें कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सरकार के इस कदम से उसकी वर्कफोर्स रणनीति या क्लाइंट्स के कामकाज पर कोई बुरा असर नहीं पड़ने वाला है।
कामकाज पर नहीं पड़ेगा कोई प्रतिकूल प्रभाव
TCS ने शुक्रवार को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के हर निर्देश का पूरी तरह से पालन करेगी। कंपनी ने विश्वास जताया कि इस निलंबन से उसके बिजनेस मॉडल या ग्राहकों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कंपनी के अनुसार, उनकी परिचालन प्रक्रियाएं इस तरह से तैयार की गई हैं कि वे इस प्रकार के नियामक बदलावों को आसानी से संभाल सकती हैं।
स्थानीय प्रतिभा और बुनियादी ढांचे पर जोर
कंपनी ने बताया कि अमेरिका में उसका पूरा ध्यान हमेशा से स्थानीय टैलेंट को जोड़ने पर रहा है और tCS के पास अमेरिका में वर्तमान में 31 दफ्तर और डिलीवरी सेंटर मौजूद हैं, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में स्थानीय अमेरिकी नागरिक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही, कंपनी अमेरिकी कॉलेज परिसरों से भी लगातार स्थानीय युवाओं की भर्ती करती आ रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
न्यूनतम निर्भरता के आंकड़े
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए TCS ने आंकड़े भी पेश किए और कंपनी ने जानकारी दी कि पिछले दो सालों के दौरान उसके PERM आवेदन सिर्फ सिंगल डिजिट यानी 10 से भी कम रहे हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी अपनी मैनपावर जरूरतों के लिए इस विशेष प्रोग्राम पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है।
भविष्य की भर्ती योजना
कंपनी ने अपनी पुरानी योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह अगले 5 सालों में अमेरिका के भीतर 15000 नए स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी देने की तैयारी में है। स्थानीय स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में भर्ती करने की योजना के कारण, PERM प्रोग्राम के निलंबन से कंपनी के भविष्य के लक्ष्यों या क्लाइंट प्रोजेक्ट्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी सरकार की सख्त कार्रवाई का विवरण
यह पूरा कदम ट्रंप प्रशासन की विदेशी कुशल कामगारों को लेकर अपनाई गई सख्त नीतियों का एक हिस्सा है। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी में इस निलंबन का औपचारिक ऐलान किया था। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि बड़ी कंपनियां स्थानीय अमेरिकी कामगारों के अधिकारों की अनदेखी कर रही हैं और वीजा नियमों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं और श्रम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वह चिन्हित की गई कंपनियों के नए और पहले से लंबित पड़े सभी PERM आवेदनों की प्रोसेसिंग को तुरंत प्रभाव से बंद कर देगा।
प्रभावित होने वाली अन्य दिग्गज कंपनियां
TCS के अलावा, इस पाबंदी के दायरे में कई अन्य वैश्विक दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें इंफोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब जैसी बड़ी कंपनियों के नाम शामिल हैं। इन सभी कंपनियों के लिए PERM प्रोग्राम की सेवाओं को फिलहाल रोक दिया गया है।
