पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर एक बड़ा राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच शुरू हुई इस लड़ाई ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सांसद कल्याण बनर्जी के बीच उपजा यह विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है, जिससे पार्टी के भीतर की कलह खुलकर सामने आ गई है। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव किए जा रहे हैं।
इस्तीफा और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पार्टी के सभी पदों से अपना इस्तीफा सौंप दिया है और इस्तीफे के बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। काकोली घोष ने अपने पत्र में कल्याण बनर्जी पर सदन के भीतर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के प्रति उनके रवैये पर सवाल उठाए हैं और इसे अशोभनीय बताया है।
काकोली घोष दस्तीदार द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप
काकोली घोष दस्तीदार ने अपने शिकायती पत्र में कल्याण बनर्जी के व्यवहार को लेकर कई बिंदु साझा किए हैं:
- कल्याण बनर्जी ने लोकसभा के भीतर कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार किया है।
- उनका व्यवहार महिला विरोधी है और वह महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं।
- यह रवैया केवल उनके प्रति ही नहीं, बल्कि सदन की अन्य महिला सांसदों के प्रति भी रहा है।
- काकोली घोष ने मांग की है कि इस तरह के व्यवहार के लिए उन्हें उचित सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
विवाद की पृष्ठभूमि और मुख्य कारण
इस पूरे विवाद के पीछे पार्टी के संसदीय ढांचे में हुए बदलावों को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर कई बड़े फेरबदल किए थे। इसी क्रम में काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप के पद से हटा दिया गया था और यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को सौंप दी गई थी। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पद से हटाए जाने की नाराजगी ही इस विवाद की असली वजह है, जिसके कारण काकोली घोष ने अब मोर्चा खोल दिया है।
कल्याण बनर्जी का पलटवार
अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए सांसद कल्याण बनर्जी ने इन्हें पूरी तरह से फर्जी और निराधार बताया है। उन्होंने काकोली घोष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सदन के भीतर किसी भी तरह का दुर्व्यवहार हुआ था, तो उसकी जानकारी तुरंत लोकसभा अध्यक्ष को दी जानी चाहिए थी। उन्होंने पूछा कि जब कथित घटना हुई, तब शिकायत क्यों नहीं की गई? बनर्जी का कहना है कि ये सभी आरोप राजनीति से प्रेरित और झूठे हैं।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस विवाद पर पार्टी के अन्य नेताओं और विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है और टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि काकोली घोष की मंशा कुछ और ही नजर आती है। वहीं, दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता तापस रॉय ने इस विवाद में कूदते हुए कहा कि कल्याण बनर्जी को अपनी भाषा और व्यवहार में संयम बरतना चाहिए और सोच-समझकर बात करनी चाहिए। फिलहाल, टीएमसी के भीतर छिड़ी यह जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।
