ट्रंप का दावा: ईरान की सैन्य क्षमताएं तबाह, पुनर्निर्माण में लगेंगे 10 साल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान को फिर से खड़ा होने में कम से कम 10 साल लगेंगे। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इन दावों को खारिज करते हुए बातचीत की खबरों को नकारा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान सैन्य स्थिति को लेकर गंभीर दावे किए हैं। ज्वाइंट बेस एंड्र्यूज जाते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान को इस हद तक नुकसान पहुंचाया है कि उसे अपने पुराने स्वरूप में लौटने के लिए कम से कम एक दशक का समय लगेगा। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि यद्यपि ईरान सैन्य रूप से काफी कमजोर हो चुका है, लेकिन वह अभी आधिकारिक तौर पर संघर्ष की समाप्ति या पूर्ण जीत की घोषणा करने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की रक्षा प्रणालियां और वायु सेना अब प्रभावी नहीं रह गई हैं।

ईरान की सैन्य क्षमताओं पर ट्रंप का आकलन

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य संरचना को बुनियादी तौर पर तोड़ दिया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनके नजरिए से ईरान को असल में हराया जा चुका है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की वायु सेना और वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है और उन्होंने कहा कि अब ईरान के पास कोई ऐसी प्रभावी प्रणाली नहीं बची है जो अमेरिकी या अन्य हमलों का मुकाबला कर सके। ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि इन अभियानों के दौरान ईरान के कई शीर्ष सैन्य और रणनीतिक नेताओं को भी निशाना बनाया गया है, जिससे उनकी कमान और नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हुई है।

खारग द्वीप और तेल बुनियादी ढांचे पर प्रहार

ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खारग द्वीप का विशेष उल्लेख किया। खारग द्वीप ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है और ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने वहां केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और तेल निर्यात से जुड़े मुख्य ढांचे को फिलहाल सुरक्षित रखा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका के पास खारग द्वीप के शेष हिस्से और तेल पाइपलाइनों को नष्ट करने की पूरी क्षमता है। ट्रंप ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिकी सेना मात्र 5 मिनट के भीतर ईरान के संपूर्ण तेल ढांचे को ध्वस्त कर सकती है, लेकिन वर्तमान में उन्होंने ऐसा न करने का निर्णय लिया है।

कूटनीतिक बातचीत और युद्धविराम की स्थिति

बातचीत की संभावनाओं पर ट्रंप ने कहा कि ईरान वर्तमान में अमेरिका के साथ संवाद करने के लिए बहुत उत्सुक है और उन्होंने दावा किया कि उन्हें मिल रही खुफिया जानकारियों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व बातचीत की मेज पर आने के लिए छटपटा रहा है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि वह अभी बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ईरान अभी उन शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है जो अमेरिका के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि किसी न किसी मोड़ पर ईरान को झुकना ही होगा और वे बातचीत के लिए तैयार हो जाएंगे और ट्रंप ने अमेरिकी सेना के कौशल की प्रशंसा करते हुए उनके कार्यों को अविश्वसनीय बताया।

ईरानी विदेश मंत्री का पलटवार और खंडन

ट्रंप के इन दावों के विपरीत, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कड़ा रुख अपनाया है। CBS न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में अराघची ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से निराधार बताया और उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान ने अमेरिका या किसी अन्य पक्ष से न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही वह बातचीत के लिए गिड़गिड़ा रहा है। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और जब तक आवश्यक होगा, वह अपना बचाव करना जारी रखेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें ईरान को 'तबाह' बताया गया था।

अमेरिकी सैन्य शक्ति और भविष्य की रणनीति

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी बातचीत के दौरान अमेरिकी सेना की मजबूती पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सैन्य शक्ति वर्तमान में अपने चरम पर है और उनके द्वारा लिए गए निर्णयों ने क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को स्थापित किया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि वह ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति को लेकर बहुत सतर्क हैं और हर कदम सोच-समझकर उठा रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि ईरान को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन अमेरिका अपनी निगरानी और सैन्य तत्परता में कोई कमी नहीं आने देगा। ट्रंप के अनुसार, आने वाले समय में ईरान की प्रतिक्रिया और उनकी बातचीत की इच्छा ही भविष्य की दिशा तय करेगी।