डोनाल्ड ट्रंप का दावा: अमेरिकी चुनाव प्रणाली में लग सकती है सेंध, चीन ने आरोपों को नकारा

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए विदेशी ताकतों द्वारा हस्तक्षेप की आशंका जताई है। हालांकि, विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की विकेंद्रीकृत चुनाव प्रणाली, जो 10000 से अधिक क्षेत्रों में बंटी है, इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित प्रणालियों में से एक बनाती है।

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप का दावा है कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसी विदेशी ताकतें, साथ ही कुछ गैर-सरकारी समूह, साइबर हमलों के माध्यम से चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि चुनावी प्रणाली में सेंध लगाकर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। ट्रंप के इन बयानों के बाद अमेरिका के चुनावी ढांचे की मजबूती पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस और चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की चुनाव व्यवस्था दुनिया की सबसे जटिल और सुरक्षित प्रणालियों में से एक है, जिसे भेदना लगभग असंभव है।

अमेरिका की विकेंद्रीकृत चुनाव प्रणाली

अमेरिकी चुनाव प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत होना है। वहां चुनाव किसी एक केंद्रीय संस्था द्वारा नहीं, बल्कि 10000 से अधिक अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं। अमेरिकी संविधान के अनुसार, चुनाव कराने का प्राथमिक अधिकार राज्यों के पास है। हर राज्य अपने नियमों के आधार पर मतदान प्रक्रिया संचालित करता है और कई मामलों में स्थानीय प्रशासन भी अपने नियम तय करता है। हालांकि कांग्रेस कुछ सामान्य नियम बना सकती है, लेकिन पूरी जिम्मेदारी राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की होती है और इस विविधता के कारण पूरे देश में कोई एक जैसा सिस्टम नहीं है, जिससे बड़े पैमाने पर साइबर हमला करना या नतीजों को बदलना बेहद कठिन हो जाता है।

धोखाधड़ी रोकने के कड़े इंतजाम

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में वोटर फ्रॉड या चुनावी धोखाधड़ी की घटनाएं बहुत कम होती हैं और जो होती हैं, वे पकड़ी जाती हैं। एक से अधिक बार वोट डालना, किसी दूसरे के नाम पर मतदान करना, मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ करना या गलत जानकारी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इन अपराधों के लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई राज्यों में मतदाताओं से पहचान पत्र मांगा जाता है। डाक के माध्यम से होने वाले मतदान (मेल-इन बैलेट) में भी सुरक्षा के कड़े मानक अपनाए जाते हैं, जैसे कि हस्ताक्षर का मिलान करना और कुछ मामलों में गवाह या नोटरी की उपस्थिति अनिवार्य करना।

2020 के चुनाव और जांच रिपोर्ट

डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि 2020 का राष्ट्रपति चुनाव उनके खिलाफ साजिश के तहत चोरी किया गया था। इस दावे की पड़ताल के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने 2021 में उन छह प्रमुख राज्यों की समीक्षा की थी जहां चुनाव परिणाम विवादित बताए गए थे। इस विस्तृत जांच में धोखाधड़ी के 475 से भी कम संभावित मामले सामने आए, जो चुनाव के अंतिम परिणाम को बदलने के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं थे। ट्रंप के धांधली के आरोपों को कई अदालतों, राज्य चुनाव अधिकारियों और उनके अपने प्रशासन के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी खारिज कर दिया था। उस समय ट्रंप द्वारा नियुक्त अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्हें ऐसे कोई सबूत नहीं मिले जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकें।

चीन की कड़ी प्रतिक्रिया

ट्रंप द्वारा लगाए गए हस्तक्षेप के आरोपों पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन ने कभी भी अमेरिकी चुनावों में दखल नहीं दिया है और न ही उसकी ऐसी कोई मंशा है और उन्होंने ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद करार दिया। लिन जियान ने अमेरिका को सलाह दी कि वह अपने आंतरिक चुनावी मुद्दों में चीन का नाम घसीटना बंद करे और दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने पर ध्यान दे। ट्रंप ने अपने संबोधन में 2020 के चुनाव में चीन के हस्तक्षेप का आरोप लगाया था, जिसे बीजिंग ने पूरी तरह से नकार दिया है।