अमेरिका का तिलस्म टूटा: 20 साल में पहली बार चीन बना दुनिया की पहली पसंद

प्यू रिसर्च सेंटर के ताजा सर्वे के अनुसार, 20 साल में पहली बार चीन की वैश्विक लोकप्रियता अमेरिका से अधिक हो गई है। सर्वे में शामिल 36 में से 25 देशों ने चीन को तरजीह दी है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले शी जिनपिंग पर अधिक भरोसा जताया गया है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहां दशकों से चले आ रहे अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को कड़ी चुनौती मिली है। प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वे के अनुसार, पिछले 20 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब दुनिया के कई देशों में चीन को अमेरिका से अधिक पसंद किया जा रहा है। यह बदलाव वैश्विक धारणा में एक बड़ी गिरावट को दर्शाता है, जहां कनाडा और मैक्सिको जैसे अमेरिका के पड़ोसी देश भी अब चीन को अधिक तरजीह दे रहे हैं। वर्षों से दुनिया भर के लोग अमेरिका को चीन से ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन इस साल यह सोच पूरी तरह बदल गई है।

सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े

प्यू रिसर्च सेंटर के इस नए सर्वे में शामिल 36 में से 25 देशों के लोगों ने अब अमेरिका के मुकाबले चीन को अपनी पहली पसंद बताया है। यह आंकड़ा वैश्विक राजनीति में अमेरिका के घटते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। दुनिया में अब केवल 6 देश ऐसे बचे हैं, जहां के लोग चीन की तुलना में अमेरिका को अधिक पसंद करते हैं। जब बात नेतृत्व की आती है, तो 36 में से 22 देशों के लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुकाबले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर अधिक भरोसा जताया है। ट्रंप को नापसंद करने वालों में केवल पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसी बड़ी यूरोपीय ताकतें भी शामिल हैं।

सर्वे की कार्यप्रणाली और समय

यह महत्वपूर्ण सर्वे फरवरी से मई के बीच आयोजित किया गया था। यह वही समय था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। प्यू रिसर्च सेंटर ने इस सर्वे के लिए 35 देशों के अलावा वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में कुल 42000 से ज्यादा लोगों से उनकी राय पूछी। आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक देश में गलती की गुंजाइश 2 दशमलव 3 प्रतिशत से 5 दशमलव 5 प्रतिशत तक रखी गई थी। प्यू रिसर्च सेंटर पिछले करीब 20 साल से इस तरह के वैश्विक सर्वे कर रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब चीन की लोकप्रियता अमेरिका से आगे निकल गई है।

ट्रंप पर घटते भरोसे के मुख्य कारण

प्यू की वैश्विक राय सर्वे की सहायक निदेशक लॉरा सिल्वर ने इस बदलाव के पीछे दो मुख्य कारण बताए हैं। उनके अनुसार, कोरोना महामारी की यादें अब धुंधली हो गई हैं और अमेरिका के प्रति दुनिया में कड़वाहट बढ़ गई है। युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर यह धारणा बनी कि अमेरिका शांति और स्थिरता बनाए रखने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा रहा है और इसके अलावा, डोनाल्ड ट्रंप की कुछ विशिष्ट कार्रवाइयों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है। इनमें ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग, वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की योजना और गाजा में इजराइल-हमास युद्ध को संभालने का अमेरिकी तरीका शामिल है। इन कारणों से कई देशों में ट्रंप के प्रति समर्थन कम हुआ है और लोग चीन को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

व्हाइट हाउस और चीन की प्रतिक्रिया

इस सर्वे के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक स्थिरता के लिए किसी भी अन्य नेता से कहीं ज्यादा काम किया है। उन्होंने ट्रंप को स्वतंत्र दुनिया का नेता बताते हुए कहा कि उनके साहसी नेतृत्व ने अमेरिका को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया है। दूसरी ओर, वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन परिणामों का स्वागत किया है। दूतावास के अनुसार, यह सर्वे दर्शाता है कि चीन की शासन व्यवस्था और उसके विकास की प्रगति को दुनिया भर में व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। चीन का मानना है कि लोग अब उसे वैश्विक शांति और स्थिरता में अमेरिका से बेहतर योगदान देने वाला साथी मान रहे हैं।