अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने कड़े तेवरों से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में जो समझौता हुआ था, उसे लेकर ट्रंप ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ लड़ाई खत्म करने के लिए जो सहमति बनी है, वह अभी पक्की नहीं है और उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है और यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच शांति का रास्ता अभी भी कांटों भरा है। ट्रंप के इस रुख से यह साफ हो गया है कि अमेरिका किसी भी समय अपनी रणनीति बदल सकता है।
समझौते की अनिश्चितता पर ट्रंप का रुख
जी-7 देशों की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पत्रकारों और विश्व नेताओं से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की वर्तमान स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुआ यह समझौता (MoU) कोई अंतिम फैसला नहीं है। ट्रंप के अनुसार, इसे केवल एक शुरुआती समझौते के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी स्थायी समाधान के रूप में। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर उन्हें इस समझौते की शर्तें पसंद नहीं आईं या ईरान ने भविष्य में सही तरीके से व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका इस समझौते को पूरी तरह से खारिज कर सकता है और ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वे ईरान पर दबाव बनाए रखने की अपनी पुरानी नीति पर कायम हैं।
सैन्य कार्रवाई और बमबारी की सीधी चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में केवल कूटनीतिक असहमति ही नहीं जताई, बल्कि सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे डाली। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, "यह कोई आखिरी फैसला नहीं है। यह सिर्फ एक शुरुआती समझौता है और " ट्रंप ने आगे कहा कि वे ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि ईरान पिछले 47 सालों से गलत काम कर रहे हैं। यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग करने के विकल्प को पूरी तरह से खुला रखे हुए है और वह किसी भी समय युद्ध की स्थिति में वापस लौट सकता है।
47 वर्षों का इतिहास और अविश्वास का माहौल
अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान के पिछले 47 सालों के इतिहास का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लंबे समय से ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जिन्हें वे गलत मानते हैं, जिसके कारण उन पर आसानी से भरोसा करना मुश्किल है। ट्रंप का मानना है कि दशकों पुराने इस विवाद और अविश्वास को एक साधारण समझौते से तुरंत हल नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब ईरान के व्यवहार में ठोस बदलाव की कोई गारंटी न हो। 47 वर्षों के इस संदर्भ ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी प्रशासन ईरान की पिछली नीतियों और उनके प्रभाव को लेकर कितना गंभीर है और वह इसे समझौते का आधार बना रहा है।
स्विट्जरलैंड में होने वाले हस्ताक्षर पर मंडराते बादल
ट्रंप का यह चौंकाने वाला बयान एक ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने में केवल 2 दिन का समय बचा है। यह महत्वपूर्ण हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड में आयोजित होना तय हुआ था, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि इस युद्ध विराम को औपचारिक रूप देने वाले थे। समझौते पर दस्तखत होने से ठीक 2 दिन पहले राष्ट्रपति की इस खुली धमकी ने पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या स्विट्जरलैंड में यह समझौता सिरे चढ़ पाएगा या ट्रंप की इस चेतावनी के बाद स्थितियां एक बार फिर तनावपूर्ण हो जाएंगी।
