अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर बड़ा और आक्रामक बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया है और ईरान के जो एक-दो परमाणु ठिकाने अभी भी बचे हैं, उन्हें भी महज दस मिनट के भीतर पूरी तरह से निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह ताजा बयान फ्लोरिडा स्थित उनके मार-ए-लागो आवास पर आयोजित एक हैलोवीन पार्टी के दौरान पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में सामने आया है। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि हमने उनके परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया है और अभी भी एक या दो ठिकाने बचे हैं, जिन्हें हमें देखना है, लेकिन हम ऐसा दस मिनट में कर सकते हैं। उनका यह आक्रामक बयान ऐसे समय पर आया है, जब दूसरी तरफ ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका को बेहद कड़ी चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी तरह के खतरे का ईरान की तरफ से तुरंत जवाब दिया जाएगा और ईरान का पलटवार किसी भी भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा हो सकता है।
मुज्तबा खामेनेई की अमेरिका को सीधी और दोटूक चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने कथित तौर पर सैन्य अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका की ओर से किसी भी स्तर का खतरा पैदा होने पर उसका तुरंत और करारा जवाब दिया जाएगा और ईरान के सरकारी मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल के संभावित ठिकानों की एक नई सूची तैयार करने का भी सख्त निर्देश जारी कर दिया है। आपको बता दें कि मुज्तबा खामेनेई को इस साल फरवरी के महीने में युद्ध शुरू होने के बाद से अभी तक सार्वजनिक रूप से बिल्कुल नहीं देखा गया है, लेकिन परदे के पीछे से उनकी यह सख्त प्रतिक्रिया और निर्देश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा करने के लिए काफी हैं और उनके इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है, जहां दोनों देश एक-दूसरे को लगातार सैन्य ताकत की धमकियां दे रहे हैं और किसी भी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है।
ईरान के साथ युद्ध के सवाल पर ट्रंप का अजीब और सपाट जवाब
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह सीधा सवाल पूछा गया कि क्या अमेरिका इसी हफ्ते ईरान के खिलाफ दोबारा से युद्ध शुरू कर सकता है, तो ट्रंप ने इस सवाल को पूरी तरह से बेवकूफी भरा करार दिया। उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए तंज कसते हुए कहा कि मान लीजिए कि मैंने ऐसा किया भी, तो क्या मैं आपको इसके बारे में पहले से बताऊंगा? इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर अपनी इस पुरानी बात को दोहराया कि ईरान के पास कभी भी भविष्य में परमाणु हथियार नहीं आ सकते हैं और इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी दावा किया कि तेहरान की सरकार अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को करने की इच्छा रखती है और समझौता करना चाहती है। हालांकि, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि उन्हें ईरान पर किसी भी प्रकार का भरोसा या विश्वास नहीं है और उन्होंने कहा कि ईरान अक्सर समझौता कर लेता है और फिर अपने वादों से पीछे हट जाता है। इतिहास गवाह है कि इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत कराने के लिए पाकिस्तान, कतर और ओमान जैसे देशों ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई थी, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास और कड़वाहट के कारण कोई भी स्थायी और ठोस समझौता सिरे नहीं चढ़ सका था।
समझौतों का टूटना और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
अगर पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो इस साल जून के महीने में दोनों देश साठ दिनों के एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू और युद्धविराम को आगे बढ़ाने के एक खास ढांचे पर आपसी सहमति जता चुके थे। हालांकि, फारस की खाड़ी के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम जैसे गंभीर मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गहरी असहमति और मतभेद बने रहे, जिसके कारण यह समझौता बहुत जल्द ही पूरी तरह से टूट गया। अमेरिका और ईरान के बीच इन तमाम अड़चनों के कारण बातचीत की मेज पर बनी सहमति भी कागजी साबित हुई और दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बना रहा। ट्रंप प्रशासन का रुख साफ है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं हैं, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और परमाणु अधिकारों के नाम पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
मोहसेन रेजाई का बड़ा दावा, जेडी वेंस के पत्र को बताया ईरान की जीत
एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि ईरान खुद अमेरिका के साथ बातचीत करने की इच्छा जता रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हालिया पत्र को ईरान की बहुत बड़ी जीत बताया है। आपको बता दें कि यह पत्र सीधे तौर पर मोहसेन रेजाई को सौंपा गया था, जो इस समय ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के साथ एक इंटरव्यू में बातचीत करते हुए मोहसेन रेजाई ने कहा कि उनके लहजे में पूरी तरह से बदलाव आ चुका है, जो कि हमारे लिए एक बहुत अच्छा संकेत है और यह साफ तौर पर दिखाता है कि हमारे देश के लोगों ने बड़ी जीत हासिल कर ली है और हालांकि, रेजाई ने यह भी पूरी स्पष्टता के साथ कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस पत्र का अभी तक कोई भी जवाब नहीं दिया है। इसके साथ ही उन्होंने उस पत्र में हुई बातचीत के किसी भी आंतरिक विवरण या गोपनीय बातों को सार्वजनिक रूप से साझा करने से साफ इनकार कर दिया।
वेंस के पत्र में सीधी बातचीत और कूटनीतिक हल की पेशकश
प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस पत्र में उनके नेतृत्व में ईरान के साथ आमने-सामने की सीधी बातचीत करने का एक औपचारिक प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव में यह भी शर्त रखी गई थी कि शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हर हाल में चर्चा के मुख्य केंद्र में शामिल किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की एक अन्य रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी दी गई है कि उस पत्र के माध्यम से दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक नई रूपरेखा यानी फ्रेमवर्क तैयार किया गया था। इस पूरी रूपरेखा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देशों और आदेशों के बाद ही तैयार करके भेजा गया था। इसके अलावा कतर के प्रसिद्ध मीडिया संस्थान ‘अल जजीरा’ ने भी अपने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी कि जेडी वेंस का यह पत्र मिलने के बाद आने वाले एक हफ्ते के भीतर ईरान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच कतर की राजधानी दोहा या फिर तुर्की के इस्तांबुल शहर में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हो सकती है, जिससे कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही थी।
फरवरी से शुरू हुआ था अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच खूनी संघर्ष
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच वर्तमान में चल रहे इस भीषण संघर्ष की शुरुआत इसी साल फरवरी के महीने में हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सेनाओं ने ईरान के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे। इन खतरनाक हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की दर्दनाक मौत हो गई थी, जो कि वर्तमान सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के अपने सगे पिता थे और पिता की मौत के बाद से ही ईरान का यह संघर्ष और अधिक आक्रामक हो गया है। इन हमलों के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी हितों, सैन्य अड्डों और सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया था। इसके साथ ही ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को भी पूरी तरह से रोक दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और व्यापार प्रभावित हुआ था। अब एक तरफ जहां राष्ट्रपति ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास ईरान के बचे हुए परमाणु ठिकानों को फिर से धूल में मिलाने की पूरी क्षमता है, तो वहीं दूसरी तरफ मुज्तबा खामेनेई ने भी अपनी जवाबी कार्रवाई को किसी भी भौगोलिक सीमा से बहुत आगे तक ले जाने की खुली चेतावनी दे दी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत होने की कुछ उम्मीदें जरूर बची हुई हैं, लेकिन जमीन पर तनाव और अविश्वास का माहौल लगातार बना हुआ है।
