अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एकतरफा सीजफायर की घोषणा करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है। कुछ समय पहले तक ईरान को पूरी तरह मिटाने और उसके बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकियां देने वाले ट्रंप के इस अचानक आए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने पहले ईरान को शांति वार्ता में शामिल न होने पर उसके पावर प्लांट और ब्रिज उड़ाने की चेतावनी दी थी और एक ऐसे हमले की बात कही थी जो पहले कभी नहीं देखा गया। हालांकि, मंगलवार की रात को उन्होंने अचानक युद्धविराम का ऐलान कर दिया।
धमकियों के बाद अचानक सीजफायर का फैसला
ट्रंप ने इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के सहयोग का सहारा लिया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ट्रंप के पास ऐसी क्या मजबूरी थी, जिसने उन्हें ईरान के अडिग रवैये के बावजूद झुकने पर मजबूर किया। विश्लेषक इसे अमेरिका का सरेंडर मान रहे हैं या फिर इसे ट्रंप की एक नई सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप की विदेश नीति अक्सर 'मैक्सिमम प्रेशर' यानी अधिकतम दबाव की रणनीति पर आधारित रही है, लेकिन ईरान के मामले में सख्त सैन्य चेतावनियों के बाद अचानक सीजफायर की ओर मुड़ना एक बड़ा बदलाव है।
सैन्य संसाधनों की कमी और आर्थिक दबाव
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के साथ टकराव के दौरान अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा है। कुछ दावों में यह बात सामने आई है कि अमेरिका के एयर डिफेंस और प्रिसीजन मिसाइल सिस्टम का एक बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के साथ सिर्फ 40 दिनों की जंग में अमेरिका ने अपने मिसाइल और गोला-बारूद के स्टॉक का लगभग 50 फीसदी हिस्सा खो दिया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संकट का खतरा पैदा हो गया है। खाड़ी देश भी अपने यहां हुए अरबों डॉलर की संपत्तियों के नुकसान के लिए अमेरिका से मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिससे ट्रंप प्रशासन पर भारी दबाव है।
रणनीतिक कदम और घरेलू राजनीति
इस कदम को केवल मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक 'डी-एस्केलेशन' (तनाव कम करने) की कोशिश भी माना जा रहा है। सीजफायर के माध्यम से अमेरिका को कूटनीतिक बातचीत के लिए समय मिल सकता है, जबकि वह सैन्य दबाव भी बनाए रख सकता है। यह रणनीति विरोधी को बातचीत की मेज पर लाने के लिए इस्तेमाल की जाती है और इसके साथ ही, अमेरिका की घरेलू राजनीति भी एक बड़ा कारक है। अमेरिकी जनता लंबे युद्धों से थक चुकी है और चुनावी माहौल में एक नया 'अनपॉपुलर वॉर' ट्रंप के लिए राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता था। इस युद्धविराम से अमेरिका को अपने सैन्य स्टॉक को फिर से जुटाने का अवसर भी मिल सकता है।
अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम और भविष्य की शर्तें
अमेरिका और ईरान के बीच बुधवार को 15 दिनों का सीजफायर खत्म होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही ट्रंप ने इसे बिना किसी शर्त के आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान की लीडरशिप दूसरे दौर की वार्ता पर अपना रुख साफ नहीं करती, तब तक यह सीजफायर जारी रहेगा और अमेरिका तेहरान पर हमले नहीं करेगा। अब अमेरिका के सामने ईरान से वार्ता शुरू करने के लिए ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज पोर्ट से ब्लॉकेड (नाकाबंदी) हटाना ही एकमात्र रास्ता बचा है। ईरान अपनी इस जिद पर अड़ा है कि जब तक नाकाबंदी नहीं हटती, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी।
