ईरान युद्ध पर ट्रंप की नीति विफल: 4 अमेरिकी सर्वे में जनता ने जताई बड़ी आशंका

अमेरिका में हुए चार अलग-अलग सर्वेक्षणों में नागरिकों ने ईरान के प्रति ट्रंप प्रशासन की नीतियों को विफल बताया है। अधिकांश अमेरिकियों को डर है कि इससे आतंकवाद और अस्थिरता बढ़ेगी।

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद अमेरिकी जनता के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है। हाल के दिनों में वाशिंगटन मीडिया द्वारा किए गए 4 अलग-अलग सर्वेक्षणों ने ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सर्वेक्षणों में शामिल अधिकांश अमेरिकियों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ जारी इस जंग में बुरी तरह विफल रहा है। टाइम्स, एबीसी, सीएनएन और प्यू रिसर्च द्वारा किए गए इन सर्वे में यह बात सामने आई है कि जनता को न तो सरकार की नीति पर भरोसा है और न ही उसकी नियत पर। नागरिकों का मानना है कि इस संघर्ष से अमेरिका को कोई ठोस सफलता मिलने वाली नहीं है और ट्रंप प्रशासन इस सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा है।

युद्ध की पृष्ठभूमि और प्रमुख सैन्य घटनाएं

इस पूरे विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर एक बड़ा हमला किया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। इस बड़े हमले के बावजूद, अमेरिका जिस तख्तापलट की उम्मीद कर रहा था, वह ईरान में नहीं हो पाया। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत का दौर चल रहा है, लेकिन अमेरिकी जनता इस बातचीत के नतीजों को लेकर काफी आशंकित नजर आ रही है और उन्हें नहीं लगता कि इससे कोई स्थायी समाधान निकलेगा।

सर्वेक्षणों के चौंकाने वाले आंकड़े और जनता की राय

न्यूयॉर्क टाइम्स-सिएना द्वारा किए गए सर्वे में जनता की राय काफी स्पष्ट दिखी। इस सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सैन्य शक्ति या दबाव के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने में कामयाब नहीं हो पाएंगे। वहीं, केवल 22 प्रतिशत लोगों का मानना था कि सैन्य बल के प्रयोग से परमाणु कार्यक्रम को रोका जा सकता है। इसके अलावा, 52 प्रतिशत नागरिकों ने यह राय दी कि इस जंग को बिना किसी औपचारिक समझौते के भी तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे इस लंबी खींचती लड़ाई से थक चुके हैं।

वाशिंगटन पोस्ट और एबीसी के संयुक्त सर्वे में भी कुछ इसी तरह के नतीजे सामने आए। इसमें 69 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अगर कोई समझौता हो भी जाता है, तब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम नहीं रुकेगा। इन लोगों का तर्क है कि ईरान पीछे के रास्ते से अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा और ट्रंप उसे पूरी तरह दबाने में सक्षम नहीं होंगे। इसी कड़ी में प्यू रिसर्च के सर्वे में शामिल दो-तिहाई लोगों ने माना कि अमेरिका ईरान में अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में पूरी तरह विफल रहेगा, जो प्रशासन के दावों के विपरीत है।

आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता का बढ़ता खतरा

एबीसी के एक अन्य सर्वे ने सुरक्षा के मोर्चे पर गंभीर चेतावनी दी है। सर्वे के अनुसार, 61 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना है कि इस युद्ध ने अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद के खतरे को काफी हद तक बढ़ा दिया है। लगभग 49 प्रतिशत लोगों ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में मध्य पूर्व की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो सकती है। वहीं, 56 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस युद्ध के कारण अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कमजोर होने का खतरा पैदा हो गया है, जो भविष्य में अमेरिकी कूटनीति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

सीएनएन के हालिया सर्वेक्षण में भी राष्ट्रपति ट्रंप की निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं। सर्वे में शामिल 59 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि ट्रंप ईरान के मामले में सही फैसला ले पाएंगे। केवल 22 प्रतिशत लोगों ने ही ट्रंप की नीतियों और उनके फैसलों पर अपना समर्थन जताया है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है।

मीडिया और विपक्ष पर बरसे राष्ट्रपति ट्रंप

इन सर्वेक्षणों और मीडिया रिपोर्टों से नाराज होकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दे और यह मान ले कि उसकी नौसेना तबाह हो चुकी है, तब भी अमेरिकी मीडिया इसे जीत नहीं मानेगा। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान में ईरानी सेना के लोग हाथ खड़े कर सरेंडर-सरेंडर चिल्लाएंगे, तो भी मीडिया इसे अमेरिका की सफलता के रूप में नहीं दिखाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने विपक्षी डेमोक्रेट्स और अमेरिकी मीडिया को भटका हुआ और पागल करार देते हुए उन पर सच्चाई छिपाने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है।