क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली और अक्सर एक-दूसरे? के विरोधी माने जाने वाले नेता एक ही मेज पर बैठकर शांति की इबारत लिखेंगे? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपने महत्वाकांक्षी 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। यह कदम न केवल गाजा के भविष्य को बदल सकता है, बल्कि वैश्विक राजनीति के समीकरणों को भी पूरी तरह से पलट सकता है।
शांति की नई बिसात और पुतिन की एंट्री
क्रेमलिन ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पुतिन को ट्रंप की ओर से यह विशेष निमंत्रण प्राप्त हुआ है। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रूस इस प्रस्ताव की बारीकियों को समझने के लिए वाशिंगटन के संपर्क में है। यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद से। अमेरिका और रूस के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। ऐसे में ट्रंप का पुतिन को गाजा के पुनर्निर्माण और शासन की देखरेख के लिए बुलाना एक साहसिक और अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है।
क्या है ट्रंप का 20-सूत्रीय रोडमैप?व्हाइट हाउस के अनुसार, यह 'बोर्ड ऑफ पीस' ट्रंप के उस व्यापक प्लान का हिस्सा है जिसे 'कॉम्प्रिहेंसिव प्लान टू एंड द गाजा कॉन्फ्लिक्ट' कहा जा रहा है। इस 20-पॉइंट रोडमैप का लक्ष्य केवल युद्ध रोकना नहीं, बल्कि गाजा को एक समृद्ध और स्थिर क्षेत्र में बदलना है और इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसमें न केवल वैश्विक नेता शामिल होंगे, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की एक फिलिस्तीनी समिति भी होगी जो जमीन पर शासन और विकास कार्यों को लागू करेगी।
पीएम मोदी और वैश्विक नेताओं का साथ
ट्रंप ने इस मिशन के लिए केवल पुतिन को ही नहीं, बल्कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई अन्य प्रभावशाली वैश्विक नेताओं को भी आमंत्रित किया है। ट्रंप जानते हैं कि गाजा जैसे जटिल मुद्दे को सुलझाने के लिए केवल अमेरिकी ताकत काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए एक बहुपक्षीय समर्थन की आवश्यकता है। पीएम मोदी की इसमें भागीदारी भारत की बढ़ती वैश्विक साख। और मध्य पूर्व में उसके संतुलित रुख को दर्शाती है।
गाजा का पुनर्निर्माण: एक नई चुनौती
इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य गाजा में रणनीतिक निरीक्षण प्रदान करना और अंतरराष्ट्रीय संसाधनों को जुटाना है। युद्ध के कारण गाजा की बुनियादी संरचना पूरी तरह तबाह हो चुकी है। ट्रंप का मानना है कि यदि रूस, भारत और अमेरिका जैसे देश एक साथ आते हैं, तो संसाधनों की कमी नहीं होगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी। यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप काम करेगा, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय वैधता भी प्राप्त होगी।
ट्रंप का असली मकसद क्या है?राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस कदम के जरिए खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और गाजा संघर्ष को सुलझाना उनके लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। साथ ही, पुतिन को इस प्रक्रिया में शामिल करके वे रूस के साथ तनाव कम करने का एक रास्ता भी तलाश रहे हैं। क्या यह बोर्ड वास्तव में गाजा में शांति ला पाएगा या यह केवल एक राजनीतिक स्टंट बनकर रह जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, ट्रंप के इस कदम ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है।