जुलाई का महीना शुरू होने वाला है और इसी के साथ भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में स्कूल भी खुलने जा रहे हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए विद्यालयों में विद्यार्थियों को गर्मी से संबंधित बीमारियों से बचाने और उनके प्रति जागरूक करने के लिए एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है।
शिक्षकों और छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा ढांचा
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा के निर्देश पर यह विशेष गाइडलाइन तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को लू लगने के लक्षणों की पहचान करने, लू से बचाव के प्रभावी तरीके, प्राथमिक उपचार और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। अधिकारियों ने रविवार को जानकारी दी कि इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और बच्चों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उन पर होगी।
जागरूकता और बचाव के उपाय
गाइडलाइन के अनुसार, शिक्षक प्रार्थना सभा, कक्षा शिक्षण और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भीषण गर्मी से बचाव के उपायों की जानकारी देंगे। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, तेज धूप से बचने, हल्के और सूती कपड़े पहनने और पानी से भरपूर फलों का सेवन करने के लिए निरंतर प्रेरित करें। इसके अलावा, बच्चों को लू लगने के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना भी सिखाया जाएगा। विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि यदि उनके किसी सहपाठी की तबीयत खराब होती है या उसे चक्कर आते हैं, तो वे तुरंत अपने शिक्षक को इसकी सूचना दें ताकि समय पर सहायता मिल सके।
हीट एक्शन प्लान और स्वास्थ्य नोडल शिक्षक
राज्य सरकार ने सभी विद्यालयों को अपना 'हीट एक्शन प्लान' तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक स्वास्थ्य नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा। यह शिक्षक गर्मी से संबंधित सभी गतिविधियों का समन्वय करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है। विद्यालय परिसर के प्रमुख स्थानों पर भीषण गर्मी से बचाव के संदेश और आपातकालीन संपर्क नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद ली जा सके।
चिकित्सा सुविधा और बाहरी गतिविधियों का समय निर्धारण
गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक विद्यालय में प्राथमिक उपचार किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर और 108 एंबुलेंस सहित आवश्यक चिकित्सा संपर्क व्यवस्था हर समय उपलब्ध होनी चाहिए। धूप के सीधे प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने निर्देश दिया है कि प्रार्थना सभा, खेलकूद, शारीरिक शिक्षा और अन्य सभी बाहरी गतिविधियां सुबह 10 बजे से पहले ही संपन्न कर ली जाएं। 10 बजे के बाद बच्चों का बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए इस समय सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा।
अलर्ट और मॉकड्रिल का कड़ाई से पालन
जब भी भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा गर्मी का 'ऑरेंज' या 'रेड' अलर्ट जारी किया जाएगा, तब स्कूलों में सभी कठिन शारीरिक और बाहरी गतिविधियां पूरी तरह से स्थगित रखी जाएंगी। स्कूलों को गर्मी से जुड़ी घटनाओं का एक विस्तृत रिकॉर्ड रखने, उनकी नियमित समीक्षा करने और मौसम विभाग के अलर्ट पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। इसके साथ ही, आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को परखने के लिए समय-समय पर 'मॉक ड्रिल' आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि शिक्षक और छात्र किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें।
