उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज जारी कर दी गई है, जो राज्य के लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण चरण है। इस सूची के जारी होने के साथ ही एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि लगभग 2. 89 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह आंकड़ा उन लाखों नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन। गया है जिनके नाम इस प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं हैं। मतदाता सूची में नाम न होना सीधे तौर पर मतदान के अधिकार को प्रभावित करता है, जो कि किसी भी लोकतंत्र में नागरिक की सबसे मूलभूत शक्ति है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की है। आयोग ने ऐसे सभी प्रभावित मतदाताओं को अपना नाम मतदाता सूची में दोबारा जुड़वाने या उसमें किसी भी प्रकार का सुधार कराने का अवसर प्रदान किया है। यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया आज से शुरू होकर अगले एक महीने तक, यानी 6 फरवरी 2026 तक चलेगी, जिसके लिए नागरिकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन करने की सुविधा दी गई है और यह सुनिश्चित करना प्रत्येक पात्र नागरिक की जिम्मेदारी है कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में सही ढंग से शामिल हो।
आवेदन की अंतिम तिथि और प्रक्रिया का अवलोकन
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम वर्तमान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं है, या उसमें किसी प्रकार का बदलाव कराना है, तो संबंधित व्यक्ति 6 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक अपनी आपत्ति या दावा दर्ज करा सकता है। यह एक महीने की अवधि मतदाताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें अपने लोकतांत्रिक अधिकार को सुरक्षित करने का अंतिम अवसर प्रदान करती है। इस अवधि के दौरान, मतदाता अपनी आपत्तियां और दावे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से प्रस्तुत कर सकते हैं। दावे और आपत्तियों की पूरी सूची उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट ceouttarpradesh. nic. in पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी। यह वेबसाइट मतदाताओं को अपनी स्थिति की जांच करने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का एक केंद्रीय मंच प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, 11 जनवरी को सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने-अपने निर्धारित बूथों पर मतदाता सूची को पढ़कर सुनाएंगे। यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिनके पास इंटरनेट तक पहुंच नहीं है या जिन्हें डिजिटल प्रक्रियाओं को समझने में सहायता की आवश्यकता है। बीएलओ द्वारा सूची का पठन मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जानने और यदि आवश्यक हो तो तुरंत कार्रवाई करने में मदद करेगा।
ऑफलाइन आवेदन की विस्तृत प्रक्रिया
जिन मतदाताओं को डिजिटल माध्यमों तक पहुंच नहीं है या जो व्यक्तिगत सहायता पसंद करते हैं, उनके लिए चुनाव आयोग ने ऑफलाइन आवेदन की एक सुलभ प्रक्रिया निर्धारित की है। इस प्रक्रिया के तहत, मतदाता अपने संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से संपर्क कर सकते हैं। बीएलओ, जो स्थानीय स्तर पर चुनाव आयोग के प्रतिनिधि होते हैं, मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने या नाम जुड़वाने में पूरी सहायता प्रदान करेंगे। यदि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है या वह किसी कारणवश लापता है, तो उसे एसआईआर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए कुछ विशिष्ट दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इन दस्तावेजों में सबसे महत्वपूर्ण 2003 की एसआईआर लिस्ट में शामिल होने का प्रमाण है, जो यह दर्शाता है कि व्यक्ति पहले भी मतदाता रहा है। यदि यह प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तो चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कोई अन्य वैध दस्तावेज भी प्रस्तुत किया जा सकता है। इन प्रमाणों के साथ, मतदाता को एक फिजिकल फॉर्म भरना होगा, जिसमें सभी आवश्यक विवरण सही-सही भरे जाएंगे। यह भरा हुआ फॉर्म फिर बीएलओ के पास जमा किया जा सकता है। बीएलओ यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म सही ढंग से भरा गया है और सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके और यह ऑफलाइन विकल्प उन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित हो सकती है।
ऑनलाइन आवेदन का चरण-दर-चरण तरीका
आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए, चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की एक सुविधाजनक और कुशल प्रक्रिया भी शुरू की है। मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने या उसमें सुधार करने के लिए, नागरिक सीधे voters. eci. gov. in वेबसाइट पर जा सकते हैं या ECINET ऐप का उपयोग कर सकते हैं।
फॉर्म नंबर 6:
यह फॉर्म उन युवा नागरिकों के लिए है जिन्होंने हाल ही में। 18 वर्ष की आयु पूरी की है और पहली बार मतदाता बनने जा रहे हैं। यह उन्हें अपनी पहचान, आयु और निवास स्थान के प्रमाण के साथ मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अनुमति देता है। इस फॉर्म के माध्यम से नए मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलता है।
फॉर्म नंबर 7:
यदि मतदाता सूची में किसी मौजूदा नाम पर आपत्ति है, जैसे कि किसी मृत व्यक्ति का नाम अभी भी सूची में है, या यदि किसी नाम में कोई सुधार कराना है, तो फॉर्म 7 भरकर आपत्ति जमा की जा सकती है। यह फॉर्म पहले से दर्ज नाम में वर्तनी की त्रुटियों, लिंग संबंधी गलतियों या अन्य व्यक्तिगत विवरणों में संशोधन के लिए भी मान्य है। यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची अद्यतन और सटीक रहे।
फॉर्म नंबर 8:
यह फॉर्म कई उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे निवास स्थान बदलना (यदि कोई मतदाता एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे में चला गया है), मौजूदा मतदाता सूची में अन्य सुधार करना, या वोटर कार्ड बदलने के लिए आवेदन करना। यह फॉर्म मतदाताओं को अपने विवरण को अद्यतन रखने और अपने मतदाता पहचान पत्र को बदलने की सुविधा प्रदान करता है, जो उनके मतदान के अधिकार के लिए महत्वपूर्ण है।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है, जिसमें स्पष्ट निर्देश और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के विकल्प शामिल हैं। यह डिजिटल सुविधा शहरी और तकनीकी रूप से साक्षर मतदाताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो घर बैठे या कहीं से भी आवेदन कर सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची
आवेदन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, मतदाताओं को अपनी पहचान, आयु और निवास स्थान को प्रमाणित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इन दस्तावेजों की सटीकता और वैधता आवेदन की स्वीकृति के लिए महत्वपूर्ण है।
केंद्र सरकार, राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) कंपनी द्वारा जारी कोई भी वैध आईडी कार्ड। यह पहचान स्थापित करने का एक प्राथमिक साधन है।
मान्य अथॉरिटी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, जो आवेदक की आयु को सत्यापित करने के लिए आवश्यक है, विशेषकर नए मतदाताओं के लिए।
मान्य शिक्षा बोर्ड से जारी दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र या कोई अन्य शैक्षिक दस्तावेज, जो आयु और पहचान के अतिरिक्त प्रमाण के रूप में कार्य कर सकता है।
ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) या अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाण पत्र, यदि आवेदक इन श्रेणियों से संबंधित है, तो यह विशिष्ट पहचान के लिए आवश्यक हो सकता है।
आधार कार्ड, जिसे पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि केवल नाम दर्ज करवाने के लिए एक आईडी के रूप में कार्य करता है।
जमीन से जुड़े दस्तावेज, जैसे संपत्ति के कागजात या किराया समझौता, जो निवास स्थान के प्रमाण के रूप में कार्य कर सकते हैं।
राज्य या स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी पारिवारिक दस्तावेज, जैसे राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर की प्रति, जो पारिवारिक संबंधों और निवास को सत्यापित करने में सहायक हो सकते हैं।
यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि सभी प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वैध, अद्यतन और स्पष्ट हों ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा या देरी से बचा जा सके। चुनाव आयोग इन दस्तावेजों के माध्यम से आवेदक की पात्रता को सत्यापित करता है।
मतदाता सूची का महत्व और आगामी चरण
मतदाता सूची में नाम का होना प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार का आधार है। यह सुनिश्चित करता है कि वे चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें और अपनी पसंद की सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभा सकें। चुनाव आयोग द्वारा प्रदान किया गया यह एक महीने का समय उन सभी पात्र नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जिनके नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं या जिन्हें अपने विवरण में सुधार की आवश्यकता है। यह अवधि नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी निभाने और यह सुनिश्चित करने। का मौका देती है कि वे आगामी चुनावों में मतदान कर सकें। सभी आवेदनों और आपत्तियों की गहन समीक्षा और सत्यापन के बाद, उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी की जाएगी और यह अंतिम सूची आगामी चुनावों के लिए आधार बनेगी और यह तय करेगी कि कौन मतदान करने का पात्र है। इसलिए, यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आपका नाम इसमें सही ढंग से और सटीक विवरण के साथ शामिल हो। चुनाव आयोग सभी नागरिकों से इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने, अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और एक मजबूत और समावेशी चुनावी प्रक्रिया में योगदान करने का आग्रह करता है।