चीन की सैन्य ताकत से अमेरिका चिंतित, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दी चेतावनी

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति पर चिंता जताई है। सैटेलाइट तस्वीरों में परमाणु मिसाइल ठिकानों के पास 80 से अधिक नए निर्माण देखे गए हैं। हेगसेथ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों में चीन के सैन्य विस्तार को लेकर चिंता होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। हेगसेथ के अनुसार, चीन जिस गति से अपनी सेना और सैन्य ढांचे को मजबूत करने में जुटा है, वह अब पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा और गंभीर मुद्दा बन गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को मौलिक रूप से बदल सकता है।

परमाणु ठिकानों के पास बड़े पैमाने पर निर्माण का खुलासा

अमेरिकी रक्षा मंत्री के इस बयान के पीछे कई ठोस और तकनीकी कारण मौजूद हैं। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने चीन के बड़े सैन्य निर्माण का चौंकाने वाला खुलासा किया है। इन तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया गया है कि चीन ने अपने परमाणु मिसाइल साइलो के आसपास बहुत बड़े पैमाने पर नई सैन्य सुविधाएं तैयार की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने इन संवेदनशील क्षेत्रों में 80 से ज्यादा नए लॉन्च पैड, बंकर और संचार केंद्र बनाए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन ढांचों का उपयोग केवल मिसाइल रखने के लिए ही नहीं, बल्कि मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और सैटेलाइट संचार के लिए भी किया जा सकता है। यह निर्माण चीन की सैन्य पहुंच को और अधिक घातक बनाता है।

शांगरी-ला डायलॉग में गूंजा क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा

हेगसेथ ने ये महत्वपूर्ण बातें सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान कहीं। आपको बता दें कि यह एशिया का सबसे बड़ा रक्षा और सुरक्षा सम्मेलन माना जाता है, जिसमें दुनिया के लगभग 45 देशों के रक्षा मंत्री, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञ हिस्सा लेते हैं। इस अंतरराष्ट्रीय मंच से बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका एशिया में किसी भी तरह का बेवजह टकराव या युद्ध नहीं चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्षेत्र में शक्ति का संतुलन हर हाल में बना रहे। अमेरिका की प्राथमिकता यह है कि कोई भी एक देश इतना अधिक ताकतवर न हो जाए कि वह दूसरे पड़ोसी देशों की सुरक्षा, शांति और स्वायत्तता को प्रभावित करने लगे।

जवाबी परमाणु हमले की तैयारी और वैश्विक चिंताएं

विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि चीन यह पूरा विशाल ढांचा अपनी जवाबी परमाणु हमला क्षमता यानी सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी को मजबूत करने के विशेष उद्देश्य से बना रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि चीन पर पहले कोई परमाणु हमला होता है, तो भी वह सुरक्षित रहकर जवाबी हमला करने में पूरी तरह सक्षम रहे। चीन के इस परमाणु हथियार कार्यक्रम और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। खासकर ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और चीन के द्विपक्षीय रिश्तों में लगातार खींचतान देखी जा रही है। कई पश्चिमी देशों ने चीन पर यह आरोप लगाया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और भविष्य की सैन्य योजनाओं के बारे में पूरी और पारदर्शी जानकारी साझा नहीं करता है। सूचनाओं की इस कमी और गोपनीयता के कारण चीन की वास्तविक मंशा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंताएं और अधिक गहरी हो गई हैं।