अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य और कूटनीतिक तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां वाशिंगटन खुद को एक जटिल स्थिति में फंसा हुआ पा रहा है। एक ओर जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के लिए तैयार नहीं है और उसका स्पष्ट कहना है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को टोल देना अनिवार्य होगा और ईरान की इस जिद ने न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि अमेरिका की रणनीतिक चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। इसी संकटपूर्ण घड़ी में यूक्रेन ने अमेरिका की सहायता के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं और यूक्रेन ने घोषणा की है कि वह अमेरिका को ऐसे हथियार और तकनीक मुहैया कराएगा जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान के नियंत्रण से मुक्त कराया जा सके।
पेंटागन और यूक्रेन के बीच रणनीतिक डील
सीबीएस न्यूज (CBS News) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने इस संबंध में पेंटागन के उच्च अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है और इस डील के तहत यूक्रेन अपने यहां निर्मित सस्ते और प्रभावी ड्रोन वाशिंगटन को भेजेगा। इन ड्रोन्स को विशेष रूप से ऐसी परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है जहां समुद्री नाकाबंदी को तोड़ना आवश्यक हो। यूक्रेन का मानना है कि इन ड्रोन्स के इस्तेमाल से होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक खुलवाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, कुछ ही दिनों पहले यूक्रेन ने अमेरिका को अत्याधुनिक रोबोट देने की भी प्रतिबद्धता जताई थी, जो जमीनी और समुद्री ऑपरेशनों में अमेरिकी सेना की क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे।
काला सागर का अनुभव और होर्मुज की चुनौती
यूक्रेन द्वारा दी जा रही यह मदद अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके पीछे ठोस ऐतिहासिक और तकनीकी कारण हैं। साल 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत हुई थी, तब रूस ने काला सागर (Black Sea) में ठीक वैसी ही नाकाबंदी कर दी थी जैसी वर्तमान में होर्मुज में देखी जा रही है। उस समय यूक्रेन ने अपने स्वदेशी सस्ते ड्रोन्स का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और रूसी नौसेना की नाकाबंदी को सफलतापूर्वक तोड़ दिया। आज स्थिति यह है कि काला सागर में यूक्रेन के जहाज बिना किसी बाधा के गुजर रहे हैं, जबकि रूसी जहाजों के लिए यह मार्ग अत्यंत असुरक्षित और खतरनाक बन चुका है और यूक्रेन इसी सफल मॉडल को अब होर्मुज में दोहराने के लिए अमेरिका को तकनीक प्रदान कर रहा है।
ईरानी शाहेद ड्रोन और लागत का गणित
यूक्रेन की इस मदद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू लागत और तकनीकी जानकारी है। यूक्रेन जो ड्रोन अमेरिका को देने जा रहा है, वे निर्माण में काफी सस्ते हैं। अमेरिका इन्हें होर्मुज के आसपास बड़ी संख्या में तैनात कर सकता है, जिससे उसके सैन्य बजट पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा और वह एक बड़ा खर्च बचा सकेगा और हालिया संघर्षों में ईरान ने अपने ड्रोन्स के माध्यम से अमेरिका को काफी नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से ईरान के 'शाहेद' (Shahed) ड्रोन्स का जिक्र महत्वपूर्ण है, जिनका उपयोग रूस पहले से ही यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में कर रहा है। यूक्रेन को इस बात का गहरा अनुभव है कि शाहेद ड्रोन्स को युद्ध के मैदान में कैसे नाकाम और पस्त किया जा सकता है। यही अनुभव अब अमेरिका के काम आएगा जब वह तेहरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की योजना बनाएगा।
ग्राउंड ऑपरेशन और रोबोटिक तकनीक का महत्व
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन (John Bolton) ने होर्मुज की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह खुलवाने के लिए जमीन पर सैनिकों को उतारना ही होगा। हालांकि, यह एक अत्यंत जोखिम भरा और संवेदनशील फैसला हो सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए यूक्रेन ने अमेरिका को सस्ते रोबोट देने का प्रस्ताव रखा है। इन रोबोट्स का उपयोग करके अमेरिका बिना मानवीय क्षति के ग्राउंड ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। यह तकनीक अमेरिकी सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई करने की अनुमति देगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक आर्थिक प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार है और ईरान के लिए यह एक रणनीतिक हथियार की तरह है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। वर्तमान तनाव के कारण ईरान ने इस रास्ते को लगभग ब्लॉक कर दिया है, जिससे अमेरिका रणनीतिक रूप से बैकफुट पर आ गया है। फारस न्यूज एजेंसी (Fars News Agency) के मुताबिक, परमाणु समझौते की बातचीत के दौरान ईरान ने एक प्रस्ताव रखा है जिसमें उसने होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण की मांग की है। हालांकि, अमेरिका इस प्रस्ताव से पूरी तरह असहमत है और वह किसी भी कीमत पर इस वैश्विक जलमार्ग पर ईरान का एकाधिकार नहीं चाहता है।
ईरान की इस जिद और होर्मुज पर नियंत्रण की मांग ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है और अमेरिका अब यूक्रेन से मिलने वाले इन सस्ते ड्रोन्स और रोबोटिक हथियारों के माध्यम से अपनी अगली रणनीति तैयार कर रहा है ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बहाल किया जा सके और ईरान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित किया जा सके।
