अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए विभिन्न हमलों को लेकर देश की जनता के बीच एक बड़ा और गहरा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में सामने आए एक विस्तृत सर्वे के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि इसमें यह तथ्य सामने आया है कि कई अमेरिकी नागरिक इन हमलों की सत्यता पर संदेह कर रहे हैं। न्यूजगार्ड (NewsGuard) और यूगोव (YouGov) द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस सर्वे में यह पाया गया है कि अमेरिकी नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा यह मानता है कि डोनाल्ड ट्रंप पर हुए कुछ हमले या तो पूरी तरह से फर्जी थे या फिर उन्हें पहले से ही किसी विशेष उद्देश्य के लिए प्लान किया गया था। यह सर्वे 28 अप्रैल से 4 मई के बीच आयोजित किया गया था, जिसमें कुल 1,000 अमेरिकी लोगों से उनकी राय पूछी गई थी। 11 मई को सार्वजनिक की गई इस रिपोर्ट के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लगभग हर तीन में से एक अमेरिकी नागरिक का यह मानना है कि ट्रंप पर हुए तीन हालिया हमलों में से कम से कम एक हमला फर्जी था।
सर्वे के मुख्य आंकड़े और घटनाक्रम
सर्वेक्षण के दौरान विशिष्ट घटनाओं को लेकर भी जनता से सवाल पूछे गए थे। इसमें 25 अप्रैल को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई घटना का विशेष उल्लेख किया गया। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन हिल्टन होटल में संपन्न हुआ था, जहां डोनाल्ड ट्रंप के साथ अमेरिका के वर्तमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई अन्य वरिष्ठ नेता व अधिकारी उपस्थित थे। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, इस घटना को लेकर 24 प्रतिशत लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमला फर्जी था। वहीं, 45 प्रतिशत लोगों का मानना था कि यह हमला पूरी तरह से असली था। इसके अलावा, करीब 32 प्रतिशत लोग ऐसे भी पाए गए जिन्हें इस पूरे मामले को लेकर कोई स्पष्ट राय नहीं थी और वे अनिश्चितता की स्थिति में थे।
राजनीतिक विचारधारा और जनसांख्यिकीय अंतर
इस सर्वे में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट समर्थकों के बीच एक बहुत बड़ा वैचारिक अंतर भी उभरकर सामने आया है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 33 प्रतिशत डेमोक्रेट समर्थकों ने ट्रंप पर हुए हमले को फर्जी करार दिया है। इसके विपरीत, रिपब्लिकन समर्थकों में केवल 8 प्रतिशत लोग ही ऐसे थे जिन्होंने इस तरह का संदेह व्यक्त किया। न्यूजगार्ड की संपादक सोफिया रुबिन्सन ने इन परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सर्वे स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अमेरिका में आम जनता का सरकार और मीडिया संस्थानों पर भरोसा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। इसके अतिरिक्त, उम्र के आधार पर भी राय में अंतर देखा गया है और रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि 18 से 29 साल के युवा वर्ग के लोग अन्य आयु समूहों की तुलना में इस बात पर अधिक विश्वास करते हैं कि ट्रंप पर हुए हमले पहले से ही सुनियोजित या प्लान किए गए थे।
पेंसिल्वेनिया और फ्लोरिडा की घटनाओं पर जनता की राय
डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमलों की श्रृंखला में सबसे गंभीर और जानलेवा हमला जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में हुआ था। उस समय ट्रंप एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, तभी एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी। इस दुखद घटना में रैली में मौजूद एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने इस हमले के हमलावर की पहचान 20 साल के थॉमस मैथ्यू क्रूक्स के रूप में की थी, जिसे बाद में सीक्रेट सर्विस के जवानों ने मौके पर ही मार गिराया था। सर्वे के अनुसार, इस पेंसिल्वेनिया वाली घटना को भी 24 प्रतिशत लोगों ने फर्जी माना है। इसके बाद, सितंबर 2024 में फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में ट्रंप के गोल्फ क्लब के पास हुई एक अन्य घटना को लेकर भी लोगों में संदेह दिखा, जहां 16 प्रतिशत लोगों ने इसे फर्जी करार दिया।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और कानूनी कार्यवाही
इन दावों और सर्वे के परिणामों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगल ने इन सभी संदेहों और दावों को पूरी तरह से गलत और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने खुद पर हमला करवाया है, वे पूरी तरह से गलत हैं। जिस दिन यानी 11 मई को इस सर्वे के परिणाम जारी किए गए थे, उसी दिन इस मामले के एक आरोपी कोल टॉमस एलन ने अदालत में अपनी पेशी के दौरान खुद को निर्दोष बताया। कोल टॉमस एलन पर पूर्व राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश करने और फेडरल एजेंट्स पर हमला करने जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं और अदालत में चल रही इस कानूनी प्रक्रिया के बीच जनता की यह राय अमेरिकी समाज में व्याप्त गहरे अविश्वास को रेखांकित करती है।
