ट्रंप की चीन यात्रा: अमेरिकी सांसदों ने ताइवान नीति पर दी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के बीच वॉशिंगटन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चार वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप को पत्र लिखकर 'वन-चाइना पॉलिसी' को दोहराने और ताइवान के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धताओं को मजबूती से निभाने की सख्त चेतावनी दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन पहुंचने के साथ ही वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में ताइवान को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) के चार अत्यंत वरिष्ठ डेमोक्रेट सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। इन सांसदों ने मांग की है कि अपनी चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका की दशकों पुरानी ‘One-China Policy’ (वन-चाइना पॉलिसी) को स्पष्ट रूप से दोहराएं और यह पत्र ऐसे समय में भेजा गया है जब राष्ट्रपति ट्रंप बीती रात ही चीन की धरती पर कदम रख चुके हैं और वहां उनकी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के साथ अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय वार्ता होने वाली है।

वरिष्ठ सांसदों की संयुक्त चेतावनी

इस महत्वपूर्ण पत्र को भेजने वाले सांसदों में अमेरिकी कांग्रेस के प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं। इनमें हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी (House Foreign Affairs Committee) के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स (Gregory Meeks), चीन मामलों की विशेष समिति के सदस्य रो खन्ना (Ro Khanna), इंटेलिजेंस कमेटी (Intelligence Committee) के जिम हाइम्स (Jim Himes) और आर्मड सर्विसेज कमेटी (Armed Services Committee) के एडम स्मिथ (Adam Smith) के नाम प्रमुख हैं। इन चारों सांसदों ने राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका अपनी दशकों पुरानी द्विदलीय ताइवान नीति (bipartisan Taiwan policy) से किसी भी प्रकार का विचलन करता है या उससे हटता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और सांसदों के अनुसार, ऐसी किसी भी स्थिति में ताइवान स्ट्रेट (Taiwan Strait) में स्थापित शांति और क्षेत्रीय स्थिरता काफी कमजोर पड़ सकती है।

वन-चाइना पॉलिसी के तीन मुख्य आधार

सांसदों ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि अमेरिका की 'वन-चाइना पॉलिसी' मुख्य रूप से तीन मजबूत आधारों पर टिकी हुई है।

सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को याद दिलाया कि अमेरिकी कानून के तहत वॉशिंगटन की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह ताइवान को पर्याप्त मात्रा में ‘defensive weapons’ (रक्षात्मक हथियार) उपलब्ध कराए। यह आपूर्ति इसलिए आवश्यक है ताकि ताइवान अपनी आत्मरक्षा की क्षमता को बनाए रख सके और किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने में सक्षम हो।

ऐतिहासिक संदर्भ और हथियारों की आपूर्ति

पत्र में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 1982 के 'US-China Communiqué' के बावजूद अमेरिका ने कभी भी ताइवान का साथ नहीं छोड़ा था। सांसदों ने विशेष रूप से ‘Second Assurance’ (दूसरे आश्वासन) का उल्लेख किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने कभी भी इस बात को स्वीकार नहीं किया है कि वह ताइवान को हथियार बेचने से पहले बीजिंग (चीन) के साथ किसी भी प्रकार की सलाह या मशविरा करेगा। सांसदों का मानना है कि ताइवान को अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में होने वाली किसी भी प्रकार की देरी ‘cross-Strait deterrence’ (क्रॉस-स्ट्रेट निवारण) की क्षमता को कमजोर करती है। इससे चीन को यह गलत संदेश जा सकता है कि वह अपनी गतिविधियों के माध्यम से अमेरिकी ताइवान नीति को प्रभावित करने या बदलने की शक्ति रखता है।

राष्ट्रपति ट्रंप से की गई तीन प्रमुख मांगें

सांसदों ने अपने पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष तीन अत्यंत महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिन्हें वे इस यात्रा के दौरान पूरा होते देखना चाहते हैं:

सांसदों ने अपने पत्र के समापन में इस बात को दोहराया है कि ताइवान जलडमरूमध्य में दीर्घकालिक शांति और सुरक्षा केवल इसी बात पर निर्भर करती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका दशकों से चली आ रही अपनी स्थापित नीतियों पर मजबूती और अडिगता के साथ कायम रहे। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे चीन के नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान इन सिद्धांतों से कोई समझौता न करें, क्योंकि यह क्षेत्र की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।