NEET पेपर लीक: यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा प्रश्नपत्र, CBI की जांच तेज

NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों ने राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच गहरे संबंधों का खुलासा किया है। यश यादव और विकास बिवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जबकि नासिक में एक एजुकेशन कंसल्टेंसी का कनेक्शन भी सामने आया है।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में हुए कथित पेपर लीक मामले की जांच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जांच एजेंसियों की हालिया पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस परीक्षा का प्रश्नपत्र यश यादव नामक व्यक्ति के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचा था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यश यादव की पहचान विकास बिवाल से थी, जो इस पूरे नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। हालांकि, इस मामले में एक अन्य आरोपी शुभम ने खुद को इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड मानने से साफ इनकार कर दिया है और अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा है कि आखिर इस पेपर लीक का असली स्रोत कौन है और इस अवैध लेनदेन में पैसे किसके माध्यम से दिए गए थे।

राजस्थान में पेपर वितरण और पीडीएफ निर्माण

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि विकास बिवाल के पिता, दिनेश बिवाल ने इस पूरे षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आरोप है कि दिनेश बिवाल ने ही पेपर की हार्डकॉपी को स्कैन किया था और उसकी एक पीडीएफ फाइल तैयार की थी। इस डिजिटल फाइल को तैयार करने के बाद, इसे राजस्थान के सीकर जिले में स्थित कई प्रमुख कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाया गया और यह खुलासा शिक्षा जगत में हड़कंप मचाने वाला है, क्योंकि सीकर को कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है। जांच एजेंसियां अब उन सभी छात्रों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्हें यह पीडीएफ फाइल भेजी गई थी।

वित्तीय लेनदेन और छात्रों से वसूली

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कई छात्रों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्हें यह प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए भारी भरकम राशि चुकानी पड़ी थी। छात्रों ने बताया कि उनसे इस पेपर के बदले 2 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की मांग की गई थी और उन्होंने यह राशि दी भी थी। इस मामले में संदिग्ध शुभम ने भले ही खुद को मास्टरमाइंड होने से मना किया हो, लेकिन जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की गहराई तक जाने की कोशिश कर रही हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य उस असली स्रोत का पता लगाना है जहां से पेपर सबसे पहले लीक हुआ था और वह किन-किन माध्यमों से होता हुआ छात्रों के हाथों तक पहुंचा।

यश यादव की पृष्ठभूमि और CBI की कार्रवाई

इस मामले में एक और दिलचस्प तथ्य यह सामने आया है कि यश यादव, जो पेपर पहुंचाने में शामिल था, वह खुद इस परीक्षा को पास करने में सफल नहीं हो सका था। वर्तमान में वह बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज (BAMS) का छात्र बताया जा रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अब इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ब्यूरो की टीम ने कई कोचिंग संस्थानों के स्टाफ और उनके मालिकों से लंबी और गहन पूछताछ की है। इसके साथ ही, गिरफ्तार किए गए आरोपियों और संबंधित छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं और अब जांच का पूरा ध्यान 'मनी ट्रेल' पर केंद्रित है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करोड़ों रुपये का यह लेनदेन किन खातों के माध्यम से हुआ।

नासिक का 'SR Education Consultancy' कनेक्शन

राजस्थान के अलावा इस मामले के तार महाराष्ट्र के नासिक से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। नासिक में पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपी शुभम खैरनार का एक बड़ा कंसल्टेंसी कारोबार सामने आया है। शुभम 'SR Education Consultancy' नाम से एक संस्थान चलाता है, जिसका कार्यालय नासिक के पॉश इलाके कनाडा कॉर्नर में स्थित है। यह संस्थान पिछले 2 से 3 वर्षों से संचालित हो रहा है और काफी फल-फूल रहा है। यह कंसल्टेंसी मुख्य रूप से MBBS, BAMS, BHMS और इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए छात्रों का मार्गदर्शन करने का काम करती है।

राजस्थान पुलिस की जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि नासिक का यह कनेक्शन इस पूरे रैकेट का एक अहम हिस्सा हो सकता है। शुभम की कंसल्टेंसी छात्रों को पंजीकरण से लेकर अंतिम प्रवेश तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से मार्गदर्शन प्रदान करती थी। इसके अलावा, NEET, JEE और CET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के बारे में भी जानकारी दी जाती थी और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन और ऑनलाइन प्रमोशन के जरिए मेधावी और जरूरतमंद छात्रों को भारी छूट का लालच देकर आकर्षित किया जाता था। फिलहाल, नासिक पुलिस भी इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है, जिससे आने वाले समय में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।