राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसीबी की टीम ने इस घोटाले के मुख्य संदिग्धों में से एक, संजय बड़ाया को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय बड़ाया एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए थाईलैंड गया हुआ था और जैसे ही वह विदेश से वापस लौटा, उसे एयरपोर्ट पर ही दबोच लिया गया। वर्तमान में एसीबी की एक विशेष टीम संजय बड़ाया को हिरासत में लेकर जयपुर के लिए रवाना हो चुकी है, जहां उससे इस घोटाले की परतों को खोलने के लिए विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई और टीम का विवरण
संजय बड़ाया की गिरफ्तारी के लिए सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने पहले से ही पुख्ता तैयारी कर रखी थी। जल जीवन मिशन घोटाले में उसकी संलिप्तता को देखते हुए एसओजी (SOG) ने उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करवाया था और जैसे ही संजय बड़ाया दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरा, वहां पहले से मौजूद एसीबी की टीम ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। यह पूरी कार्रवाई डीआईजी डॉक्टर रामेश्वर सिंह के कुशल सुपरविजन में अंजाम दी गई। इस विशेष टीम में एसपी महावीर प्रसाद शर्मा, एसपी भूपेंद्र सिंह और एसपी हिमांशु कुलदीप सहित विभाग के अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल थे। इस सफल ऑपरेशन को डीजी गोविंद गुप्ता और एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के स्पष्ट निर्देशों और मार्गदर्शन पर पूरा किया गया है।
लुक आउट नोटिस और विदेश यात्रा का घटनाक्रम
संजय बड़ाया की भूमिका इस पूरे घोटाले में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यह सामने आया था कि वह पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी से ठीक दो दिन पहले ही विदेश के लिए रवाना हो गया था। इसी कारण एसओजी उस समय उसे पकड़ने में विफल रही थी। संजय बड़ाया पर गंभीर आरोप हैं कि वह पूर्व मंत्री महेश जोशी के लिए 'बंधी' यानी रिश्वत के पैसे एकत्र करने का मुख्य जरिया था। डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि संजय बड़ाया के किसी भी एयरपोर्ट, चाहे वह जयपुर हो या देश का कोई अन्य हवाई अड्डा, पर पहुंचने की स्थिति में उसे तुरंत पकड़ने के लिए लुक आउट नोटिस को सक्रिय रखा गया था, जिसके परिणामस्वरूप आज यह सफलता मिली है।
पूर्व मंत्री महेश जोशी से पूछताछ और घोटाले के तथ्य
इस मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी से एसीबी की टीम लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान रविवार रात तक जोशी से कुल 24 घंटे तक गहन सवाल-जवाब किए गए। एसीबी इस 960 करोड़ रुपये के विशालकाय घोटाले में अपने स्तर पर पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है। पूछताछ के दौरान महेश जोशी से जेजेएम घोटाले में किए गए फर्जीवाड़े, ठेकेदारों और जलदाय विभाग के अधिकारियों से वसूली जाने वाली घूस की रकम के बारे में कई तीखे सवाल पूछे गए। हालांकि, जोशी ने घूस लेने के आरोपों से साफ इनकार किया है।
कोर्ट में पेशी और आगामी कानूनी प्रक्रिया
पूर्व मंत्री महेश जोशी की रिमांड अवधि अब समाप्त हो रही है, जिसके बाद उन्हें सोमवार को एसीबी कोर्ट में पेश किया जाएगा। जोशी ने पूछताछ के दौरान अपना बचाव करते हुए कहा कि उनके पास फाइलें निचले स्तर के अधिकारियों से आती थीं, जिन्हें उन्होंने केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत एप्रूव किया था। उन्होंने किसी भी प्रकार के वित्तीय भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी में अपनी संलिप्तता को स्वीकार नहीं किया है। अब संजय बड़ाया की हिरासत के बाद एसीबी को उम्मीद है कि दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से इस 960 करोड़ रुपये के घोटाले के कई नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
