मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के दफ्तर में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की हलचल काफी तेज देखी जा रही है। सूत्रों से प्राप्त नवीनतम जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम ने एक लंबी और गहन पूछताछ की प्रक्रिया के बाद गुरुग्राम से मुख्य आरोपी यश यादव को हिरासत में लिया है। यश यादव को हिरासत में लेने के बाद जांच एजेंसी उसे जयपुर लेकर आई है, जहां उससे इस पूरे सिंडिकेट के बारे में विस्तार से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी का यह स्पष्ट दावा है कि इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए दो भाई, दिनेश और मांगीलाल, सीधे तौर पर यश यादव के संपर्क में थे।
सिंडिकेट का खुलासा और आमने-सामने पूछताछ
सीबीआई की जांच में यह बात सामने आई है कि दिनेश और मांगीलाल ने कथित तौर पर यश यादव से ही नीट परीक्षा का पेपर खरीदा था। अब इस पूरे नेटवर्क और पेपर लीक के रूट का पूरी तरह से खुलासा करने के लिए सीबीआई इन तीनों आरोपियों—यश यादव, दिनेश और मांगीलाल—को एक साथ आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि पेपर लीक की यह कड़ी कहां से शुरू हुई और इसमें और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं। एजेंसी को संदेह है कि यह एक बहुत बड़ा सिंडिकेट है जिसका जाल कई राज्यों में फैला हुआ है।
परिजनों का पक्ष और बच्चों के परिणाम का हवाला
जब इस पूरे मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए मीडिया की टीम जमवारामगढ़ स्थित दिनेश और मांगीलाल के आवास पर पहुंची, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। यह परिवार एक दो मंजिला आलीशान मकान में रहता है और आर्थिक रूप से काफी संपन्न नजर आता है। हालांकि, परिवार के सदस्यों ने सीबीआई द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है। मांगीलाल की पत्नी सोनू देवी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके परिवार पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उनके पास वास्तव में पेपर होता, तो उनके घर के चारों बच्चे परीक्षा में सफल होते।
सीकर कनेक्शन और लापता बेटे की चिंता
सोनू देवी का बेटा अमन भी इस बार नीट की परीक्षा में शामिल हुआ था और वह राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में रहकर अपनी तैयारी कर रहा था। अमन वहां दिनेश के बेटे ऋषि के साथ ही रहकर पढ़ाई करता था। दूसरी ओर, आरोपी दिनेश की पत्नी रजनी ने भी अपने पति को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। रजनी ने स्पष्ट किया कि उनके पति का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या किसी भी अन्य राजनीतिक दल से कोई सक्रिय संबंध नहीं है। रजनी ने एक गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि उनका बेटा ऋषि, जो सीकर में नीट की तैयारी कर रहा था, सोमवार से लापता है और उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। परिवार का कहना है कि उन्हें देश की कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, लेकिन उन्हें डर है कि उनके बेटों को किसी गहरी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।
जांच के दायरे में 1,000 छात्र और राकेश का नाम
दिनेश की मां प्रभु देवी ने भी अपने बेटों का बचाव करते हुए कहा कि वे मेहनत और ईमानदारी से अपना जीवन यापन कर रहे थे और वे इस तरह के किसी भी अपराध में शामिल नहीं हो सकते। हालांकि, सीबीआई की जांच के तार कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दिनेश का अक्सर सीकर आना-जाना लगा रहता था, जहां उसका बेटा ऋषि पढ़ाई कर रहा था। जांच एजेंसी को प्रबल संदेह है कि ऋषि के माध्यम से ही यह लीक पेपर 'राकेश' नाम के एक व्यक्ति तक पहुंचाया गया था। इसके बाद, इस लीक पेपर को कथित तौर पर लगभग 1,000 छात्रों के बीच सर्कुलेट किया गया था।
जांच के दौरान यह भी पता चला है कि जहां दिनेश की रुचि राजनीति में थी, वहीं मांगीलाल प्रॉपर्टी के व्यवसाय में सक्रिय रूप से काम कर रहा था। अब एसओजी और सीबीआई की टीमें इन्हीं कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं कि आखिर एक प्रॉपर्टी डीलर और राजनीतिक झुकाव रखने वाले व्यक्ति के पास पेपर लीक का इतना विशाल और संगठित नेटवर्क कैसे पहुंचा। जांच एजेंसी अब राकेश की तलाश और उन 1,000 छात्रों की पहचान करने में जुटी है जिन्हें कथित तौर पर यह पेपर उपलब्ध कराया गया था।
