NEET-UG पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, NTA को हटाने और दोबारा परीक्षा की मांग

नीट-यूजी पेपर लीक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। FAIMA ने याचिका दायर कर NTA को हटाने, सीबीआई से 4 हफ्ते में रिपोर्ट मांगने और कोर्ट की निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है। याचिका में नई संस्था NEIC के गठन और सीबीटी मॉडल अपनाने का सुझाव दिया गया है।

नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित पेपर लीक का गंभीर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। इस मामले में दायर एक महत्वपूर्ण याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे हटाने और एक नई, अधिक सक्षम संस्था के गठन की पुरजोर मांग की गई है और यह कानूनी कदम चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके। याचिका में इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करने और परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

FAIMA की याचिका और प्रमुख मांगें

सर्वोच्च न्यायालय में यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस मामले की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया जाए और अगले चार हफ्तों के भीतर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाए। याचिका की सबसे प्रमुख मांगों में से एक NTA के ढांचे में बड़ा सुधार करना या उसे पूरी तरह से बदलकर एक नई, मजबूत, हाई-टेक और स्वतंत्र संस्था का निर्माण करना है। FAIMA का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में सेंधमारी की घटनाओं ने छात्रों के भरोसे को तोड़ा है, इसलिए एक ऐसी संस्था की जरूरत है जो आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो।

उच्च स्तरीय समिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल

याचिका में NEET-UG 2026 की परीक्षा को फिर से आयोजित करने की अपील की गई है। याचिकाकर्ता ने यह भी प्रस्तावित किया है कि दोबारा होने वाली इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक हाई-लेवल कमेटी के माध्यम से की जाए। इस प्रस्तावित कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा की जानी चाहिए। इसके अलावा, समिति में तकनीकी और वैज्ञानिक पहलुओं की जांच के लिए एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि जब तक देश में 'राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग' (NEIC) नामक नई संस्था का गठन नहीं हो जाता, तब तक यही समिति परीक्षा की सुरक्षा मानकों की जांच और उसे प्रमाणित करने का कार्य करे।

डिजिटल सुरक्षा और सीबीटी मॉडल का प्रस्ताव

परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए याचिका में कई तकनीकी सुधारों का सुझाव दिया गया है। इसमें प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए उन्हें डिजिटल रूप से लॉक करना अनिवार्य बनाने की मांग की गई है। पेपर लीक के खतरों को जड़ से खत्म करने के लिए याचिकाकर्ता ने परीक्षा को पारंपरिक ऑफलाइन मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मॉडल में आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है और याचिका में स्पष्ट किया गया है कि ऑफलाइन परीक्षा में प्रश्न पत्रों को भौतिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में भारी जोखिम होता है, जिसे सीबीटी मॉडल अपनाकर पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

जांच के तथ्य और परीक्षा रद्दीकरण का विवरण

अभी तक की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि परीक्षा का पेपर प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचने से पहले ही लीक हो गया था। जांच के दौरान पाया गया कि बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल लीक हुए पेपर से हूबहू मेल खाते थे। इस पेपर लीक का जाल पांच अलग-अलग राज्यों तक फैला हुआ है। राजस्थान में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद, NTA ने नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। उल्लेखनीय है कि 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा में देश भर के 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था।

NTA ने मंगलवार को एक आधिकारिक ट्वीट के माध्यम से पुष्टि की है कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा को अब पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए नई तारीखों की घोषणा बहुत जल्द की जाएगी और फिलहाल, सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि पेपर लीक के पीछे जिम्मेदार दोषियों को पकड़ा जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।