राजस्थान में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट (NEET) परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है और परीक्षा के पेपर से मिलते-जुलते कई सवाल एक विशेष गैस पेपर में पाए जाने के बाद मामले की गंभीरता काफी बढ़ गई है। इस प्रकरण में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने सक्रियता दिखाते हुए सीकर सहित प्रदेश के कई अन्य स्थानों से कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जहां एक ओर एसओजी मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है और डोटासरा ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ा घोटाला करार देते हुए इसकी उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है।
केरल के गैस पेपर से 150 सवालों के मिलान का दावा
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने मीडिया से रूबरू होते हुए इस मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि नीट के मुख्य पेपर में आए लगभग 150 प्रश्न केरल के एक गैस पेपर से हूबहू मेल खाते हैं। डोटासरा ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कैसे संभव है कि जो प्रश्न नीट के आधिकारिक पेपर में थे, वही प्रश्न केरल के इस गैस पेपर में उसी क्रम और नंबरिंग के हिसाब से मौजूद थे। उन्होंने कहा कि देश के अन्य प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान भी अपने गैस पेपर तैयार करते हैं, लेकिन केवल केरल के इस गैस पेपर से ही सवालों का इस तरह मिलना निश्चित रूप से 100% पेपर आउट होने का प्रमाण है। डोटासरा के अनुसार, यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित पेपर लीक का मामला है जिसने परीक्षा की शुचिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
एडीजी विशाल बंसल के बयान पर डोटासरा का पलटवार
गोविंद सिंह डोटासरा ने एडीजी विशाल बंसल के हालिया बयान को आड़े हाथों लिया और उसे हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने कहा कि नीट का पेपर पिछली बार और उससे पहले भी लीक हुआ था, लेकिन अब तो स्वयं एक जिम्मेदार अधिकारी के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पेपर लीक हुआ है। डोटासरा ने आलोचना करते हुए कहा कि एक उच्च पदस्थ अधिकारी का यह कहना कि 'यह पेपर सबके पास आ गया था इसलिए इसे आउट नहीं माना जा सकता', पूरी तरह से तर्कहीन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब पेपर अनधिकृत रूप से सार्वजनिक हो गया, तो उसे लीक ही माना जाना चाहिए। डोटासरा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से पेपर माफियाओं को शह मिलती है और जांच की दिशा भटकती है।
राज्य स्तरीय जांच की सीमाओं और सीबीआई की आवश्यकता
डोटासरा ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले की गंभीरता और इसके अंतरराज्यीय कनेक्शन को देखते हुए राजस्थान की स्टेट एजेंसी इसकी पूरी जांच नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जब हमारी कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, तब विपक्ष द्वारा ऐसा माहौल बनाया गया था कि सरकार खुद पेपर लीक करवा रही है। डोटासरा ने स्वीकार किया कि पेपर माफिया एक बड़ी चुनौती है और सरकारों का काम इन पर अंकुश लगाना होता है। उन्होंने कहा कि उनकी पूर्ववर्ती सरकार ने भी प्रयास किए थे और वर्तमान सरकार भी कोशिश कर रही है, लेकिन फिर भी पेपर लीक हो गया। डोटासरा ने मांग की कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और इसकी जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए क्योंकि एक राज्य की पुलिस अन्य राज्यों में फैले इस जाल को पूरी तरह नहीं तोड़ सकती।
सख्त कानून और किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना
डोटासरा ने पात्रता परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में पैदा हुए डर और अविश्वास की खाई पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए एक करोड़ रुपये के जुर्माने और आजीवन कारावास की सजा का कड़ा प्रावधान किया था। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह पूरे देश में ऐसा ही सख्त कानून बनाकर लागू क्यों नहीं कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पर भी निशाना साधा। डोटासरा ने कहा कि किरोड़ी लाल मीणा हमारी सरकार के समय छोटी-छोटी बातों पर बड़े आंदोलन करते थे और एसआई भर्ती मामले को उन्होंने अपनी मूंछ का बाल बना लिया था। उन्होंने सवाल किया कि अब जब नीट पेपर लीक का इतना बड़ा मामला सामने आया है, तो वह चुप क्यों हैं और डोटासरा ने आरोप लगाया कि उन्हें बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है, वे केवल अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता कर रहे हैं।
अंत में डोटासरा ने नीट एजेंसी (NTA) के अध्यक्ष की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी सुप्रीम कोर्ट और कानूनी आदेशों का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की गई थी, जबकि नीट का पेपर तब भी लीक हुआ था। उन्होंने कहा कि जब राजस्थान में बच्चों ने लीक पेपर के आधार पर परीक्षा दी है, तो इसका परिणाम न केवल यहां बल्कि पूरे देश के रिजल्ट को प्रभावित करेगा और डोटासरा ने सरकार को चेतावनी दी कि वह इस मामले में अपनी विफलता स्वीकार करे और एसओजी द्वारा पकड़े गए लोगों पर किन धाराओं में कार्रवाई की जा रही है, इसे स्पष्ट करे। उन्होंने दोहराया कि सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है और अब केवल सीबीआई जांच ही छात्रों को न्याय दिला सकती है।
