पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आयोजित 21 घंटे की मैराथन शांति वार्ता बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गई है। इस वार्ता की विफलता के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना हो गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत के विफल होने की पुष्टि करते हुए अमेरिका के रुख की कड़ी आलोचना की है। मंत्रालय के अनुसार, परमाणु हथियार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे संवेदनशील विषयों पर दोनों देशों के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है।
वार्ता की विफलता के चार मुख्य कारण
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार, बातचीत के दौरान चार प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण का था। इसके अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सीमाएं, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और ईरान तथा उसके सहयोगियों के खिलाफ जारी सैन्य संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की शर्तों पर दोनों पक्ष एकमत नहीं हो पाए और ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की ओर से रखी गई शर्तें 'अवैध' और 'अत्यधिक' थीं, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था।
ईरानी विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख और अमेरिका पर आरोप
प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान अमेरिका द्वारा किए गए वादों को तोड़ने के पुराने अनुभवों को नहीं भूला है। उन्होंने अमेरिका पर 'ज्यादा मांगों और गैर-कानूनी अनुरोधों' का दबाव बनाने का आरोप लगाया। बघाई ने कहा कि ईरान अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वह दूसरे या तीसरे थोपे गए युद्धों के दौरान किए गए अपराधों को माफ नहीं करेगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के साथ आगे किसी भी वार्ता की कोई योजना नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और सैन्य जहाजों पर प्रतिबंध
वार्ता के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा सबसे अधिक तनावपूर्ण रहा। आईआरजीसी (IRGC) नौसेना कमान ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें अमेरिकी जहाजों के इस क्षेत्र से गुजरने की बात कही गई थी। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सैन्य जहाजों को इस मार्ग से गुजरने देने के किसी भी प्रयास का पूरी सख्ती और कठोरता से सामना किया जाएगा। ईरान के अनुसार, यह समुद्री रास्ता केवल विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत गैर-सैन्य जहाजों के आवागमन के लिए ही खुला है।
पाकिस्तान की मेजबानी और कूटनीतिक गतिरोध
इस उच्च स्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान सरकार द्वारा की गई थी। ईरानी विदेश मंत्रालय ने वार्ता के आयोजन के लिए पाकिस्तान की सरकार और वहां की जनता का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर यह प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी। बघाई ने जोर देकर कहा कि किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता दूसरे पक्ष की गंभीरता, सद्भावना और अनुचित मांगों से दूर रहने पर निर्भर करती है। फिलहाल, यूरेनियम संवर्धन, फ्रीज की गई संपत्तियों की बहाली और प्रतिबंधों को हटाने जैसे मुद्दों पर गतिरोध बरकरार है।
