ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: मिलिट्री कमांडर से राजनेता बने गालिबाफ संभालेंगे कमान

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ता में तेहरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व सैन्य कमांडर और तेहरान के मेयर रहे गालिबाफ की भूमिका इस नाजुक कूटनीतिक चर्चा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता में तेहरान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। शनिवार को होने वाली इस वार्ता पर वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह दशकों के तनाव के बाद दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का एक दुर्लभ अवसर है। गालिबाफ के साथ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और करीब 86 सदस्यों का एक विस्तृत प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद पहुंचा है।

इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल और प्रतिनिधिमंडल

अधिकारियों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का इस्लामाबाद पहुंचना क्षेत्र में बदलते कूटनीतिक समीकरणों का संकेत है। इस वार्ता का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब लेबनान और इजराइल के बीच संघर्ष को लेकर तनाव चरम पर है। हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री की ओर से बेरूत के साथ युद्धविराम के संकेतों के बाद ही ईरानी दल ने पाकिस्तान के लिए उड़ान भरी। गालिबाफ को इस मिशन की जिम्मेदारी उनके व्यापक सैन्य और राजनीतिक अनुभव के कारण सौंपी गई है, जिससे वे ईरान के भीतर विभिन्न गुटों के बीच एक सेतु का काम कर सकते हैं।

सैन्य पृष्ठभूमि और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से संबंध

23 अगस्त 1961 को तोरकाबेह में जन्मे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का करियर सैन्य और प्रशासनिक उपलब्धियों से भरा रहा है। वे 1979 की क्रांति के बाद बासिज और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल हुए थे। उन्होंने 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण इकाइयों की कमान संभाली। इसके बाद, उन्होंने IRGC एयरोस्पेस फोर्स के प्रमुख (1997-2000) और ईरान की नेशनल पुलिस के चीफ (2000-2005) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके पास पॉलिटिकल ज्योग्राफी में पीएचडी है और वे एक प्रमाणित पायलट भी हैं।

तेहरान के मेयर से पार्लियामेंट स्पीकर तक का सफर

गालिबाफ ने 2005 से 2017 तक तेहरान के मेयर के रूप में कार्य किया, जहां उन्हें शहर के बुनियादी ढांचे और शहरी विकास में बड़े बदलाव लाने का श्रेय दिया जाता है। हालांकि वे चार बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़े और सफल नहीं हुए, लेकिन ईरानी राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना रहा। 2020 में वे ईरानी संसद के अध्यक्ष चुने गए। इससे पहले उन्होंने एक्सपीडिएंसी डिस्कर्नमेंट काउंसिल और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिससे उन्हें सुरक्षा और कूटनीति के मामलों में गहरी विशेषज्ञता हासिल हुई।

प्रैक्टिकल हार्डलाइनर की छवि और वार्ता की चुनौतियां

ईरानी राजनीति में गालिबाफ को एक 'प्रैक्टिकल प्रिंसिपलिस्ट' या व्यावहारिक कट्टरपंथी माना जाता है। वे एक ओर IRGC के प्रति वफादार हैं, तो दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यों में व्यावहारिक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अमेरिका जैसे देश के साथ बातचीत करना, जिसे ईरान में दशकों से 'ग्रेट सैटन' कहा जाता रहा है, गालिबाफ के लिए एक बड़ी चुनौती है। उनकी यह भूमिका ईरान के भीतर कट्टरपंथियों और सुधारवादियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

क्षेत्रीय तनाव और शांति वार्ता का संदर्भ

इस्लामाबाद में हो रही यह बातचीत पिछले 48 घंटों के घटनाक्रमों के बीच अत्यंत संवेदनशील मानी जा रही है। इजराइल और लेबनान के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों ने इस वार्ता के लिए एक पृष्ठभूमि तैयार की है। गालिबाफ के नेतृत्व में ईरानी दल का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना हो सकता है। इस वार्ता के परिणाम न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों, बल्कि मध्य पूर्व की समग्र सुरक्षा स्थिति को भी प्रभावित कर सकते हैं।