मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। अमेरिका और ईरान के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल एक मेज पर बैठने के लिए तैयार हैं और इस वार्ता की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने संभाली है। इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और पूरे शहर में धारा 144 लागू कर दी गई है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरे
इस ऐतिहासिक वार्ता के लिए अमेरिका की ओर से पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर और नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कमान संभाली है। वहीं, ईरान ने अपने सबसे अनुभवी कूटनीतिज्ञों को मैदान में उतारा है, जिनमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब इजराइल और लेबनान के मोर्चे पर युद्ध की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के बयान से उपजा विवाद
शांति वार्ता के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है और ख्वाजा आसिफ ने इजराइल को लेकर अत्यंत कड़े शब्दों का प्रयोग किया, जिससे मेजबान देश की तटस्थता पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, दबाव बढ़ने के बाद उन्होंने अपना पोस्ट हटा दिया, लेकिन इस बयान ने इजराइल को अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज करने का आधार दे दिया है। अधिकारियों के अनुसार, इजराइली वायुसेना ने संभावित हमलों के लिए अपने लड़ाकू विमानों को स्टैंडबाय पर रखा है।
ईरान का 10 सूत्रीय एजेंडा और शर्तें
ईरान ने वार्ता की मेज पर अपना 10 सूत्रीय एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। तेहरान की प्रमुख शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों से कर वसूली का अधिकार शामिल है। इसके अतिरिक्त, ईरान ने मांग की है कि अमेरिका को पश्चिमी एशिया से अपनी सैन्य उपस्थिति पूरी तरह समाप्त करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण शर्त लेबनान पर इजराइली हमलों को तत्काल रोकने की है, जिसके बिना ईरान किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं दिख रहा है।
ट्रंप का 15 सूत्रीय प्रस्ताव और परमाणु मुद्दा
अमेरिकी पक्ष की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को मेज पर रखा गया है। इस प्रस्ताव की पहली और सबसे कड़ी शर्त ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी है, जिसमें ईरान से सारा यूरेनियम हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे और क्षेत्रीय मित्र राष्ट्रों को दी जाने वाली सैन्य सहायता को समाप्त करे। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि समझौता नहीं होता है, तो ईरान को और भी कड़े आर्थिक और सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
तेहरान में धमाके और सैन्य सक्रियता
एक तरफ इस्लामाबाद में शांति की मेज सजी है, तो दूसरी तरफ ईरान की राजधानी तेहरान के उत्तर-पूर्वी हिस्सों से विस्फोटों की खबरें आ रही हैं। ओजगोल, कनात कौसर और लाविजान जैसे क्षेत्रों में धमाकों की आवाज सुनी गई है और रिपोर्टों के अनुसार, इन क्षेत्रों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय नहीं थे, जिससे हमलों की सटीकता बढ़ गई। इजराइल ने इस वार्ता से खुद को अलग रखा है और वह ईरान पर ‘अंतिम प्रहार’ की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे वार्ता की सफलता पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
