अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस 2 मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री शनिवार सुबह सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लौट आए हैं। नासा के अंतरिक्ष यान ने सैन डिएगो तट के पास लैंडिंग की और अधिकारियों के अनुसार, इस ऐतिहासिक 10 दिवसीय मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने 690,000 मील से अधिक की दूरी तय की। इस मिशन की सफलता के बाद अब नासा आर्टेमिस 3 की तैयारी में जुट गया है, जिसका लक्ष्य इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।
ऐतिहासिक मिशन और चालक दल की वापसी
अंतरिक्ष यात्रियों के वापस लौटने पर नासा ने यान की लैंडिंग का आधिकारिक वीडियो साझा किया। इस मिशन में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन शामिल थे। यह मिशन 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा के इतने करीब लेकर गया। नासा के अनुसार, अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के चारों ओर एक चक्कर लगाया और फिर सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में लैंडिंग की। इस दल में पहली बार एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक गैर-अमेरिकी सदस्य को शामिल कर इतिहास रचा गया है।
तकनीकी चुनौतियां और सफल प्रक्षेपण
आर्टेमिस 2 मिशन की राह आसान नहीं थी। पहले यह मिशन फरवरी के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन हाइड्रोजन ईंधन रिसाव के कारण इसे टालना पड़ा। रिसाव की मरम्मत के बाद हीलियम प्रेशर लाइन में भी रुकावट देखी गई थी, जिसके कारण रॉकेट को वापस मरम्मत के लिए ले जाना पड़ा। नासा के पास प्रक्षेपण के लिए केवल छह दिनों की विंडो थी। यदि इस दौरान प्रक्षेपण नहीं होता, तो मिशन को अगले महीने तक टालना पड़ता। हालांकि, सभी तकनीकी बाधाओं को दूर करते हुए फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से 32 मंजिला रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी।
10 दिनों का अंतरिक्ष सफरनामा
इस 10 दिवसीय यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पहले 25 घंटे पृथ्वी की निचली कक्षा में बिताए। यहां उन्होंने कैप्सूल की सभी प्रणालियों की गहन जांच की। इसके बाद मुख्य इंजन को चालू किया गया, जो उन्हें चंद्रमा की ओर ले गया। अपोलो मिशनों के विपरीत, यह यान चंद्रमा पर नहीं उतरा और न ही उसकी कक्षा में रुका। ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के पास से गुजरा और उससे लगभग 6,400 किलोमीटर आगे जाने के बाद यू-टर्न लेकर वापस पृथ्वी की ओर बढ़ा। इस प्रक्रिया के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष में सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड भी बनाया।
नई तकनीकों और सुविधाओं का परीक्षण
आर्टेमिस 2 मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन कैप्सूल की जीवन रक्षक प्रणालियों का परीक्षण करना था। आर्टेमिस 1 मिशन में कोई मानव सवार नहीं था, इसलिए उसमें पानी की व्यवस्था और शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं थीं। इस बार अंतरिक्ष में पहली बार इन प्रणालियों का वास्तविक उपयोग किया गया। नासा ने चालक दल को चंद्रमा की ओर भेजने से पहले पृथ्वी की कक्षा में एक पूरा दिन बिताने का निर्देश दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उपकरण सही ढंग से काम कर रहे हैं। इन प्रणालियों की सफलता भविष्य के लंबे चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है।
आर्टेमिस 3 और भविष्य की योजनाएं
आर्टेमिस 2 की सफलता ने नासा के अगले बड़े लक्ष्य 'आर्टेमिस 3' के लिए आधार तैयार कर दिया है। आर्टेमिस 3 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना है। नासा के अधिकारियों के अनुसार, यह मिशन साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में शुरू हो सकता है। आर्टेमिस 2 के जरिए विमान की मजबूती और सुरक्षा मानकों की पुष्टि हो चुकी है। अब नासा चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जो भविष्य में मंगल ग्रह के मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।
