नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) को अपने महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन 'आर्टेमिस II' के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा है। फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर में आयोजित एक महत्वपूर्ण 'वेट ड्रेस रिहर्सल' के दौरान, नासा के शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में हाइड्रोजन ईंधन के रिसाव का पता चला है। यह परीक्षण वास्तविक लॉन्च काउंटडाउन की नकल करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रॉकेट और उसकी प्रणालियां अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हाइड्रोजन रिसाव और तकनीकी चुनौतियां
कैनेडी स्पेस सेंटर में दिन भर चले फ्यूलिंग ऑपरेशन के दौरान, इंजीनियरों ने रॉकेट के निचले हिस्से में अत्यधिक हाइड्रोजन जमा होने की समस्या दर्ज की। 6 मिलियन लीटर) से अधिक सुपर-कूल्ड लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरा जाना था। लॉन्च टीम ने हाइड्रोजन भरने की प्रक्रिया को कम से कम 2 बार रोका। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या 2022 के आर्टेमिस I टेस्ट फ्लाइट के दौरान आई बाधाओं के समान है। उस समय भी इसी तरह के रिसाव के कारण रॉकेट को कई महीनों तक लॉन्च पैड पर ही रोकना पड़ा था। हालांकि, इस बार नासा की टीम ने पुरानी तकनीकों का उपयोग करते हुए रिसाव को स्वीकार्य सीमा तक नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की और रॉकेट को पूरी तरह से फ्यूल कर लिया।
चालक दल की तैयारी और मिशन का उद्देश्य
इस ऐतिहासिक मिशन के लिए चुने गए 4 अंतरिक्ष यात्री—कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टिना कोच और जेरेमी हेंसन—ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर से इस परीक्षण की बारीकी से निगरानी कर रहे थे। ये चारों अंतरिक्ष यात्री पिछले डेढ़ सप्ताह से क्वारंटाइन में हैं ताकि मिशन से पहले उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके और आर्टेमिस II एक 10 दिवसीय मिशन है, जिसका उद्देश्य ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण करना है। यह चालक दल चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगा और पृथ्वी पर वापस लौटेगा, लेकिन वे चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग नहीं करेंगे। यह मिशन भविष्य के उन अभियानों के लिए आधार तैयार करेगा जिनमें चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने की योजना शामिल है।
लॉन्च विंडो और संभावित देरी
नासा के अधिकारियों के अनुसार, इस सफल परीक्षण के आधार पर आर्टेमिस II को 8 फरवरी से लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, लॉन्च के लिए समयसीमा काफी सीमित है। रॉकेट को हर हाल में 11 फरवरी तक उड़ान भरनी होगी। यदि इस अवधि के भीतर तकनीकी या मौसम संबंधी कारणों से लॉन्च नहीं हो पाता है, तो मिशन को मार्च तक के लिए टाला जा सकता है। फरवरी की लॉन्च विंडो पहले ही कड़ाके की ठंड के पूर्वानुमान के कारण 2 दिन कम हो चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि नासा किसी भी प्रकार का जोखिम लेने से बच रहा है, क्योंकि यह आधी सदी से भी अधिक समय बाद चंद्रमा के लिए पहला मानव मिशन होगा।
विशेषज्ञ विश्लेषण और भविष्य की राह
अंतरिक्ष विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन रिसाव जैसी समस्याएं क्रायोजेनिक ईंधन प्रणालियों में आम हैं, लेकिन मानव मिशन के मामले में सुरक्षा सर्वोपरि है। विश्लेषकों का कहना है कि नासा का 'सेफ्टी-फर्स्ट' दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी छोटी त्रुटि को उड़ान से पहले ही ठीक कर लिया जाए। आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल चंद्रमा पर फिर से कदम रखना है, बल्कि वहां एक स्थायी उपस्थिति बनाना भी है, जो भविष्य में मंगल ग्रह के मिशनों के लिए एक लॉन्चिंग पैड के रूप में कार्य करेगा। अपोलो कार्यक्रम के बाद यह पहली बार है जब मानवता चंद्रमा की गहराई में जाने की तैयारी कर रही है।
निष्कर्षतः, हालांकि ईंधन रिसाव ने कुछ चिंताएं पैदा की हैं, नासा की टीम ने परीक्षण को पूरा कर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें फरवरी की लॉन्च विंडो पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्या 2025 की शुरुआत में इंसान एक बार फिर चंद्रमा के करीब पहुंच पाएगा या नहीं।
