नासा के पर्सेवरेंस रोवर को मंगल पर मिले प्राचीन समुद्र तट के सबूत

नासा के पर्सेवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर में एक प्राचीन समुद्र तट के ठोस प्रमाण खोजे हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में किए गए इस शोध से संकेत मिलते हैं कि लगभग 3.5 अरब साल पहले इस लाल ग्रह पर एक विशाल झील मौजूद थी।

नासा के पर्सेवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। रोवर द्वारा भेजे गए आंकड़ों और तस्वीरों के विश्लेषण से लाल ग्रह पर एक प्राचीन समुद्र तट (Beach) के साक्ष्य मिले हैं। यह खोज इस सिद्धांत को और मजबूती प्रदान करती है कि मंगल ग्रह पर कभी न केवल पानी मौजूद था, बल्कि वहां का वातावरण लंबे समय तक जीवन के अनुकूल भी रहा होगा। इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष हाल ही में 'जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स' में प्रकाशित हुए हैं।

जेजेरो क्रेटर और मार्जिन यूनिट का विश्लेषण

पर्सेवरेंस रोवर वर्तमान में जेजेरो क्रेटर नामक क्षेत्र की जांच कर रहा है, जिसे वैज्ञानिकों ने इसके प्राचीन जलीय इतिहास के कारण चुना था। शोधकर्ताओं ने क्रेटर के आंतरिक किनारे पर स्थित 'मार्जिन यूनिट' नामक क्षेत्र की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों का गहन विश्लेषण किया। इन तस्वीरों में लहरों की क्रिया से बने समुद्र तट के स्पष्ट संकेत मिले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां पाए गए चट्टानी ढांचे और रेत के दाने पृथ्वी पर पाए जाने वाले तटीय क्षेत्रों के समान हैं। 5 अरब साल पहले जेजेरो क्रेटर एक विशाल झील से भरा हुआ था, जिसके किनारों पर लहरें टकराती थीं।

खनिजों की संरचना और लहरों का प्रभाव

अध्ययन के दौरान मार्जिन यूनिट में ओलिविन और कार्बोनेट से भरपूर गोलाकार रेत के दाने पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन कणों का गोलाकार होना इस बात का प्रमाण है कि वे लंबे समय तक पानी की लहरों के घर्षण से घिसे हैं और इंपीरियल कॉलेज के पीएचडी शोधकर्ता और अध्ययन के मुख्य लेखक एलेक्स जोन्स के अनुसार, समुद्र तट पृथ्वी पर रहने योग्य सबसे सक्रिय वातावरणों में से एक होते हैं। वहां बनने वाले कार्बोनेट खनिज प्राचीन जलवायु की जानकारी को अपने भीतर सुरक्षित रख सकते हैं। यह खोज मंगल की पिछली जलवायु और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है।

सतह के नीचे जल संचलन के प्रमाण

इंपीरियल कॉलेज के पृथ्वी विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संजीव गुप्ता ने बताया कि यह अध्ययन केवल सतह के पानी तक सीमित नहीं है। आंकड़ों से पता चलता है कि मार्जिन यूनिट में सतह के नीचे भी पानी लंबे समय तक मौजूद रहा होगा। इस भूमिगत जल ने चट्टानों की रासायनिक संरचना को लगातार बदला, जिससे वहां हाइड्रोथर्मल वातावरण विकसित हुआ। पृथ्वी पर इस तरह के वातावरण सूक्ष्मजीवों के जीवन को सहारा देने के लिए जाने जाते हैं। यह निष्कर्ष इस संभावना को बल देता है कि मंगल पर सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए आवश्यक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रही होंगी।

पर्सेवरेंस रोवर का मिशन और भविष्य की योजनाएं

पर्सेवरेंस रोवर फरवरी 2021 में मंगल पर उतरा था और तब से वह प्राचीन जीवन के संकेतों की तलाश कर रहा है। 2023 और 2024 के दौरान रोवर ने मार्जिन यूनिट का विस्तार से अध्ययन किया और वहां से चट्टानों के कोर सैंपल (नमूने) एकत्र किए हैं। इन नमूनों को भविष्य के 'मार्स सैंपल रिटर्न' मिशन के माध्यम से पृथ्वी पर लाने की योजना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच करने पर मंगल के इतिहास और वहां जीवन की मौजूदगी के बारे में अंतिम पुष्टि की जा सकेगी। वर्तमान खोज यह स्पष्ट करती है कि मंगल पर शांत झील की स्थिति पहले के अनुमानों की तुलना में अधिक समय तक स्थिर रही थी।

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