संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते की विस्तृत जानकारी सामने आई है, जो वैश्विक राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान एक गारंटर के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा और समझौते के कागजों पर हस्ताक्षर करेगा। इस कूटनीतिक पहल के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक अमेरिका द्वारा तेहरान में 300 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करना है। यह निवेश समझौते के सफल कार्यान्वयन के बाद किया जाएगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि समझौते के लागू होने के 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से दुनिया के लिए खोल दिया जाएगा।
नेतृत्व की भूमिका और 60 दिनों की समयसीमा
इस परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं और इन दोनों शीर्ष नेताओं के हस्ताक्षर के बाद ही यह समझौता पूरी तरह से अमल में आएगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति और वार्ता दल के प्रमुख जेडी वेंस ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया है कि समझौते की दिशा में काफी प्रगति हुई है, हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। यह एक अंतरिम समझौता होगा जिसकी अवधि 60 दिनों के लिए निर्धारित की गई है। इस अवधि का उपयोग भविष्य के पूर्ण समझौते की नींव रखने के लिए किया जाएगा।
दो चरणों में पूर्ण होगा समझौता
सऊदी अरब के प्रमुख समाचार पत्र अल हदथ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे समझौते को दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में केवल अंतरिम समझौते के कुछ चुनिंदा बिंदुओं को ही लागू किया जाएगा और इसके बाद, एक पूर्ण और व्यापक समझौते तक पहुँचने के लिए दोनों पक्षों के बीच बैठकों का दौर आयोजित किया जाएगा। इस अंतरिम चरण में पाकिस्तान को गारंटर बनाना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है और अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक, 60 दिनों के इस समझौता ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के होगी। ईरान ने वादा किया है कि वह 30 दिनों के भीतर इस मार्ग को पूरी तरह साफ कर देगा, जिससे वहां कोई टोल या अन्य परेशानी नहीं होगी।
वित्तीय लेनदेन और कतर की भूमिका
समझौते के वित्तीय प्रावधानों के तहत, ईरान को कतर में रखे गए उसके जब्त पैसे वापस मिलेंगे। हालांकि इस कुल राशि का अभी तक स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन ईरान की मांग है कि उसे डील के समय कम से कम 12 अरब डॉलर की राशि तुरंत प्रदान की जाए। ईरान का कहना है कि वह इस धन का उपयोग देश में राहत और बचाव कार्यों के लिए करना चाहता है। पाकिस्तान की गारंटर के रूप में मौजूदगी इस बात को सुनिश्चित करेगी कि दोनों पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करें।
परमाणु हथियार और यूरेनियम का मुद्दा
ईरान ने इस समझौते के तहत यह वचन दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान के पास मौजूद 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का भविष्य क्या होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मुख्य समझौते के प्रस्ताव में इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। वर्तमान स्थिति के अनुसार, यह संवर्धित यूरेनियम अभी ईरान में ही रहेगा और मेहर समाचार एजेंसी ने पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह डील अब अपने अंतिम चरण में है, हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
तेल और बुनियादी ढांचे में 300 अरब डॉलर का निवेश
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह परमाणु समझौता सफल रहता है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद ईरान में 300 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना सकते हैं। यह निवेश मुख्य रूप से तेल उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ओमान में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका को यह प्रस्ताव दिया था कि अमेरिकी कंपनियां ईरान के कच्चे तेल के उत्पादन में निवेश कर सकती हैं। उस समय बात नहीं बन पाई थी, लेकिन अब इस 300 अरब डॉलर के निवेश के साथ समझौते की संभावनाएं फिर से प्रबल हो गई हैं।
