अमेरिका ईरान शांति समझौता: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, क्या 65 डॉलर तक आएगा क्रूड?

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो महीनों में क्रूड 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है, जिससे भारत को बड़ी राहत मिलेगी।

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। इस कूटनीतिक सफलता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में छाई अनिश्चितता को कम कर दिया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में कीमतों में और भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है। इस समझौते से न केवल वैश्विक तनाव कम हुआ है, बल्कि तेल की आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं भी दूर हो रही हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता और हस्ताक्षर की तारीख

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के बाद अब समझौते पर सहमति बन गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों देश पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की अगुवाई में 19 जून को इस महत्वपूर्ण डील पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि ट्रंप और ईरान के बीच समझौता होने जा रहा है, उसी समय से कच्चे तेल के दामों में तेज गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। बाजार ने इस कूटनीतिक विकास का जोरदार स्वागत किया है।

कीमतों में गिरावट का यह सिलसिला पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है। बीते शुक्रवार को जब समझौते की खबरें बाजार में आने लगी थीं, तब कच्चे तेल के दाम में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। सोमवार को जब डील की आधिकारिक घोषणा हुई और हस्ताक्षर की तारीख पक्की हुई, तो कीमतों में गिरावट और भी तेज हो गई। सोमवार को तेल की कीमतों में करीब 4 से 5 प्रतिशत की और कमी आई। यह इस बात का संकेत है कि बाजार अब शांति और स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: क्या 65 डॉलर तक गिरेगा भाव?

केडिया कैपिटल के संस्थापक अजय केडिया ने वर्तमान बाजार की स्थिति पर अपना महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है। उनके अनुसार, जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव में स्थिरता आ रही है, उसे देखते हुए आने वाले 2 महीनों में तेल की कीमतों में और भी बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। केडिया का अनुमान है कि जो कच्चा तेल अभी 80 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, वह आने वाले समय में गिरकर 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकता है।

अगर कच्चे तेल के दाम 65 से 70 डॉलर के स्तर पर पहुंचते हैं, तो इसका सीधा और बड़ा फायदा भारत को होगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कमी आने से भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे देश के आयात बिल में कमी आएगी और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।

बाजार की वर्तमान स्थिति और ऐतिहासिक आंकड़े

कच्चे तेल की कीमतों में आई इस गिरावट को समझने के लिए पिछले कुछ समय के आंकड़ों पर गौर करना जरूरी है और तनाव और युद्ध की स्थिति के दौरान कच्चे तेल के भाव 127 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गए थे। लेकिन शांति की खबरों ने बाजार के इस उबाल को पूरी तरह शांत कर दिया है। सोमवार 15 जून 2026 की शाम करीब 8 बजकर 40 मिनट पर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, क्रूड ऑयल के दाम करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए थे।

इसी तरह, ब्रेंट क्रूड में भी बड़ी गिरावट देखी गई और यह 83 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। बाजार के जानकारों का कहना है कि 19 जून को होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद बाजार में और भी स्पष्टता आएगी। फिलहाल, निवेशकों और तेल आयात करने वाले देशों की नजरें इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन पर टिकी हुई हैं।

  • अमेरिका और ईरान 19 जून को पाकिस्तानी पीएम की मौजूदगी में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
  • शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत की कमी आई थी।
  • सोमवार 15 जून 2026 को शाम 8 बजकर 40 मिनट पर क्रूड 80 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
  • ब्रेंट क्रूड की कीमत भी गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है।
  • विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार अगले दो महीनों में भाव 65 से 70 डॉलर तक गिर सकते हैं।
  • तनाव के समय तेल की कीमतें 127 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।