अमेरिका ईरान शांति समझौता: युद्ध में किसकी हुई जीत और क्या है जेनेवा डील के समीकरण?

अमेरिका और ईरान के बीच 100 दिनों से अधिक समय से चल रहा युद्ध अब शांति समझौते की ओर बढ़ रहा है। जेनेवा में होने वाले इस समझौते में प्रतिबंधों को हटाने, 300 अरब डॉलर की फंडिंग और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देश जेनेवा में एक शांति प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लगाने की तैयारी कर रहे हैं और इस समझौते के साथ ही दोनों देशों के बीच चल रहा युद्ध लगभग समाप्त हो गया है। हालांकि इस युद्ध में दोनों ही पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका और ईरान दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। अब सबकी नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं। इस घटनाक्रम को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता एक ऐसी शादी की रस्म की तरह है जहां रस्में तो हो गई हैं, लेकिन अंगूठी का दिखना अभी बाकी है। यह टिप्पणी सोमवार को हुई अहम डील-टू-डू-अ-डील के संदर्भ में की गई है।

शांति समझौते के मुख्य बिंदु और शर्तें

अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते का पूरा टेक्स्ट अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह एक 14 सूत्रीय मेमोरेंडम है। इस समझौते में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की बात कही गई है। दोनों पक्षों ने यह वादा किया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेंगे और समझौते के तहत अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाएगा और अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर आसपास के इलाकों से अपनी सेना हटाने का वादा करता है। इसके बदले में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाएगा।

आर्थिक मदद और प्रतिबंधों की समाप्ति

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान का आर्थिक पुनर्वास है और अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी ईरान के विकास के लिए एक व्यापक योजना बनाएंगे, जिसके तहत कम से कम 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, अमेरिका ईरान पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को खत्म करने का वादा करता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल हैं। यह प्रक्रिया अंतिम समझौते के तहत तय किए गए शेड्यूल के अनुसार पूरी की जाएगी। जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हट जाते, तब तक अमेरिका ईरानी तेल निर्यात के लिए विशेष छूट प्रदान करेगा। साथ ही, बातचीत की प्रगति को देखते हुए ईरान के फ्रीज किए गए फंड और संपत्ति को भी जारी करने का वादा किया गया है।

परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज का पेंच

ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद 440 किलोग्राम (970 पाउंड) अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर अंतिम फैसला अगले 60 दिनों के भीतर किया जाना है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस अवधि के दौरान ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति जारी की जा सकती है, हालांकि अमेरिका ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। इस शांति समझौते के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बनी हुई है। अमेरिकी इंटेलिजेंस रिपोर्ट और सीएनएन के अनुसार, ईरान के पास अब ऐसी क्षमता है कि वह जब चाहे इस वैश्विक ऊर्जा मार्ग को बाधित कर सकता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया है कि वे ट्रांजिट टोल नहीं वसूलेंगे, लेकिन नेविगेशन सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और जहाज के बीमा जैसी सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया और भविष्य की राह

इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर इस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न के पास बर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में किए जाएंगे और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ पहले ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस डील पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। शुक्रवार को वेंस असली दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे, जबकि ईरान का प्रतिनिधित्व गालिबाफ करेंगे। यह युद्ध 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के साथ शुरू हुआ था और 100 दिनों से अधिक समय तक चला। अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि अगर ईरान परमाणु हथियार न बनाने और हथियारबंद समूहों की फंडिंग रोकने जैसे वादों पर कायम रहता है, तो उसे इस समझौते के तहत असली फायदे मिल सकते हैं।