अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। दोनों देश युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते के अंतिम चरण में पहुंच गए हैं और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सरकारी टेलीविजन के साथ बातचीत में इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हुई है। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, क्योंकि इस प्रस्तावित डील का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु चिंताओं का समाधान करना है।
प्रस्तावित समझौते के मुख्य बिंदु
विदेश मंत्री अरागची के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और हाल के दिनों में यह तनाव का केंद्र रहा है। इसके साथ ही, समझौते में ईरान के खिलाफ लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाने का भी प्रावधान है और अरागची ने स्पष्ट किया कि हालांकि समुद्री मार्ग और नाकाबंदी जैसे मुद्दों पर सहमति बन रही है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत और गहन बातचीत बाद के चरणों में की जाएगी।
डोनाल्ड ट्रंप का रुख और 14 सूत्रीय रिपोर्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत में हुई बड़ी प्रगति को देखते हुए उन्होंने ईरान पर होने वाले नए हमलों की योजना को रद्द कर दिया है और ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, शुक्रवार को ईरानी मीडिया में एक 14 सूत्रीय समझौते की खबरें सामने आई थीं, जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप ने गलत करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन रिपोर्टों में बताई गई शर्तों का वास्तविक समझौते से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वे बातचीत की वर्तमान दिशा से संतुष्ट हैं।
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता
इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जानकारी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के दस्तावेज यानी एमओयू (MOU) पर सहमति बन चुकी है। अब केवल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस समझौते पर ऑनलाइन माध्यम से हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह डिजिटल हस्ताक्षर प्रक्रिया इस उच्च-स्तरीय कूटनीति को अंतिम रूप देने का एक आधुनिक तरीका होगी।
ईरान के भीतर आंतरिक मतभेद
समझौते की राह में ईरान के भीतर कुछ चुनौतियां भी हैं। विदेश मंत्री अरागची ने स्वीकार किया कि देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में इस समझौते को लेकर राय बंटी हुई है। परिषद के कुछ सदस्य इस डील के पक्ष में हैं, जबकि कुछ इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसी आंतरिक मतभेद के कारण अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है। अब यह देखना होगा कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व इन मतभेदों को दूर कर समझौते को मंजूरी देता है या नहीं।
60 दिनों का परमाणु रोडमैप और प्रतिबंध
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, समझौते के लागू होने के बाद सबसे पहले होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाएगा और ईरानी जहाजों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को हटाया जाएगा। इसके तुरंत बाद, परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। इस अवधि के दौरान, ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को नष्ट करने या उसे देश से बाहर ले जाने की योजना पर काम किया जाएगा और अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि ईरान को कोई भी आर्थिक राहत या जमी हुई संपत्ति पहले नहीं दी जाएगी। प्रतिबंधों में ढील और आर्थिक लाभ पूरी तरह से चरणबद्ध तरीके से होंगे और ईरान जैसे-जैसे शर्तों को पूरा करेगा, उसे उसी अनुपात में आर्थिक लाभ दिया जाएगा।
हिज्बुल्लाह और क्षेत्रीय सुरक्षा की शर्त
इस समझौते की एक और महत्वपूर्ण शर्त ईरान द्वारा हिज्बुल्लाह और क्षेत्र के अन्य सशस्त्र समूहों को दी जाने वाली सहायता को बंद करना है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता केवल वादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक धरातल पर की गई कार्रवाई और उसकी कड़ी जांच पर आधारित होगा। वर्तमान में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर सभी इस समझौते को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं, लेकिन अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है।
