अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते का पुरजोर बचाव किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे युद्ध और तनाव को समाप्त करना है। हालांकि, इस समझौते को इजराइल के कुछ वरिष्ठ नेताओं की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। वेंस ने इजरायली नेताओं की उस नीति पर सवाल उठाए हैं जिसमें सैन्य कार्रवाई और मार-काट को ही प्राथमिकता दी जाती है।
जेडी वेंस का इजराइली मंत्रियों को जवाब
एक हालिया इंटरव्यू के दौरान, जेडी वेंस ने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच द्वारा ईरान-अमेरिका डील पर की गई टिप्पणियों की तीखी आलोचना की। वेंस ने सीधे तौर पर उनसे सवाल किया कि उनका वास्तविक प्रस्ताव क्या है। उन्होंने कहा कि इजराइल 90 लाख लोगों का देश है और कोई भी देश अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान सिर्फ लोगों को मारकर नहीं निकाल सकता। वेंस ने इजराइल में मची इस खलबली को थोड़ा अजीब बताया और कहा कि यह अविश्वास की वजह से हो सकता है, जबकि उनका मानना है कि अमेरिका ने उस क्षेत्र में अपना भरोसा कायम किया है।
इजराइल के विरोध के मुख्य कारण
इजराइल के आलोचक इस पीस डील को लेकर कई गंभीर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि यह समझौता ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है और इसके अलावा, समझौते में ईरान के परमाणु ठिकानों को खत्म करने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखाया गया है। इजराइली नेताओं का एक बड़ा डर यह भी है कि यह समझौता लेबनान में हिज्बुल्लाह उग्रवादियों के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई को सीमित कर देगा, जिससे उनकी उत्तरी सीमा की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
जी7 शिखर सम्मेलन और डोनाल्ड ट्रंप की सलाह
फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के समापन पर डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। बुधवार को अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने इजराइल को सलाह दी कि वह लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई में थोड़ा संयम बरते और कम आक्रामक रुख अपनाए और यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कड़ा रुख
शांति समझौते के बाद अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजराइल अमेरिका के साथ अपने संबंधों की बहुत सराहना करता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इजराइल की उत्तरी सीमा पर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दक्षिणी लेबनान पर कब्जा बनाए रखना जरूरी है और नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि उनके सामने कई चुनौतियां हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा से जुड़े हितों पर मजबूत रुख अपनाना होगा।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इजराइल अपने मुख्य लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। " इसके साथ ही उन्होंने वादा किया कि इजराइल लेबनान सीमा के पास सुरक्षा बहाल करेगा। उनके अनुसार, इसके लिए दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा जोन बनाए रखना अनिवार्य है और जब तक इजराइल की सुरक्षा जरूरतें इसकी मांग करेंगी, तब तक वे वहां से पीछे नहीं हटेंगे। नेतन्याहू का यह बयान दर्शाता है कि शांति समझौते के बावजूद इजराइल अपनी रक्षात्मक नीतियों पर अडिग है।
