अमेरिका-ईरान समझौता: न्यूक्लियर इंस्पेक्शन और मिसाइल प्रोग्राम पर तकरार, ट्रंप ने दी बातचीत रद्द करने की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता संकट में है। ईरान ने परमाणु निरीक्षण और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा से इनकार कर दिया है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने निरीक्षण न होने पर डील रद्द करने की धमकी दी है।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए शांति समझौते पर हस्ताक्षर तो हो गए हैं, लेकिन कुछ बुनियादी मुद्दों पर असहमति ने इस पूरी प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है। दोनों देशों के बीच कई ऐसे अनसुलझे विषय हैं जिन पर अभी भी खींचतान जारी है और इस बीच ईरान ने एक ऐसी शर्त रख दी है जिससे पूरी डील के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। तेहरान ने स्पष्ट रूप से न्यूक्लियर इंस्पेक्शन यानी परमाणु निरीक्षण से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।

मिसाइल कार्यक्रम पर ईरानी राष्ट्रपति का कड़ा रुख

मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दोटूक शब्दों में कहा है कि उनके देश के मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं की जाएगी और उन्होंने साफ किया कि भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता में इस मुद्दे को शामिल नहीं किया जाएगा। पेजेशकियान ने तर्क दिया कि ईरान की मिसाइल क्षमता देश की संप्रभुता और रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, यह मिसाइलें किसी भी बाहरी हमले से बचाव का एक मजबूत और अनिवार्य साधन हैं। ईरानी राष्ट्रपति ने यहां तक कहा कि अगर ईरान के पास आत्मरक्षा के लिए ये मिसाइलें न होतीं, तो इजराइल अमेरिका के सहयोग से ईरान का भी वही हाल करता जो उसने गाजा का किया है। उन्होंने पश्चिमी देशों पर मानवाधिकारों के मामले में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वे गाजा में न तो युवाओं पर रहम कर रहे हैं और न ही बुजुर्गों पर दया दिखा रहे हैं।

मध्यस्थता और समझौते का दायरा

इस विवाद के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भी बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम कभी भी अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत या समझौते का हिस्सा नहीं था। पाकिस्तान ने इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। शहबाज शरीफ ने कहा कि पूरी वार्ता के दौरान बैलिस्टिक मिसाइल का मुद्दा न तो कभी उठाया गया और न ही इस पर कोई चर्चा हुई। उनके अनुसार, समझौते के आधिकारिक दस्तावेजों में भी इसका कोई जिक्र नहीं है। यह बयान ईरान के उस दावे को पुष्ट करता है कि मिसाइल कार्यक्रम इस शांति प्रक्रिया के दायरे से बाहर है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और निरीक्षण की शर्त

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। पेंसिल्वेनिया में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने परमाणु निरीक्षण से जुड़े विवाद पर अपनी राय रखी और ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पहले ही संयुक्त राष्ट्र की टीम द्वारा जांच किए जाने की बात पर सहमत हो चुका है। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो इस निरीक्षण का विरोध कर रहे हैं और कहा कि वे जानते हैं कि वे गलत हैं। ट्रंप के अनुसार, आंतरिक बातचीत के दौरान ईरान ने अपनी मंजूरी दी थी और जांच के लिए 100 प्रतिशत तैयारी की बात कही गई थी। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने IAEA को न्यूक्लियर इंस्पेक्शन करने से रोका, तो वे ईरान के साथ चल रही पूरी बातचीत को तुरंत कैंसिल यानी रद्द कर देंगे।

14 सूत्रीय MoU और भविष्य का रोडमैप

उल्लेखनीय है कि दोनों देशों ने तनाव कम करने के लिए हाल ही में एक 14 सूत्रीय MoU पर सहमति जताई थी। इस समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी मंजूरी दी थी। हालांकि इसके औपचारिक हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में होने तय थे, लेकिन इसे पहले ही प्रभावी कर दिया गया था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को टालना है। इसी सिलसिले में 21-22 जून को स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई थी। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और पूर्ण समझौता करने का रोडमैप तैयार किया था। इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशेष कमेटी का भी गठन किया गया है।

IAEA प्रमुख का बयान और निरीक्षण की तैयारी

इस राजनीतिक गहमागहमी के बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। टोक्यो में पत्रकारों से बात करते हुए ग्रॉसी ने कहा कि उनके इंस्पेक्टर जल्द ही ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों का दौरा करेंगे। उन्होंने इसे अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी समझौते का एक अनिवार्य हिस्सा बताया। ग्रॉसी ने कहा कि यह निरीक्षण चाहे एक-दो दिन में हो, एक हफ्ते में हो या फिर 10 दिन बाद, लेकिन यह निश्चित रूप से होगा। यह निरीक्षण इस बात की पुष्टि करने के लिए महत्वपूर्ण है कि ईरान समझौते की शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं।