US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में पहले दिन की वार्ता, ईरान ने रखीं कड़ी शर्तें

पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दिन की शांति वार्ता संपन्न हुई। चार घंटे चली इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की फ्रीज संपत्तियों पर गहन चर्चा हुई, जबकि इजराइल ने अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है।

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई शांति वार्ता के पहले दिन का घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के केंद्र में रहा। पाकिस्तान की मेजबानी में हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने करीब चार घंटे तक चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, पहले दौर की बातचीत के बाद दूसरे दौर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव को कम करना और एक स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। हालांकि, पहले दिन की चर्चा में कई मुद्दों पर गतिरोध भी देखने को मिला है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर तीखी बहस

वार्ता के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर तीखी बहस हुई। ईरान इस मार्ग पर जहाजों से टोल वसूलने की अपनी मांग पर अड़ा है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रखने पर जोर दे रहा है। जेडी वेंस ने इस्लामाबाद पहुंचते ही स्पष्ट किया कि ईरान को बातचीत की मेज पर गंभीरता दिखानी होगी।

ईरान की चार प्रमुख शर्तें और परमाणु कार्यक्रम

शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने चार मुख्य शर्तें रखी हैं और पहली शर्त के अनुसार, ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नहीं रोकेगा, जिसका अर्थ है कि उसका परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा। दूसरी शर्त में लेबनान पर इजरायली हमलों को पूरी तरह बंद करने की मांग की गई है। तीसरी शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल वसूली के अधिकार को बनाए रखने की है। चौथी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त विभिन्न देशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को तत्काल बहाल करने की है और ईरान ने स्पष्ट किया है कि इन शर्तों पर सहमति के बिना वार्ता का सफल होना कठिन है।

120 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों का विवरण

ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए उसकी फ्रीज संपत्तियों की बहाली सबसे अहम मुद्दा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के विभिन्न देशों में ईरान के करीब 100 अरब डॉलर से 120 अरब डॉलर फंसे हुए हैं। इसमें चीन के पास 20 अरब डॉलर, इराक में 10 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया में 7 अरब डॉलर शामिल हैं। 5 अरब डॉलर की राशि फ्रीज है। यह पैसा मुख्य रूप से तेल की बिक्री और ऊर्जा व्यापार से संबंधित है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण बैंकों में अटका हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू का कड़ा रुख

इस्लामाबाद में चल रही वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में ईरान को 'विफल राष्ट्र' करार दिया। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज को खोलने में अधिक समय नहीं लगेगा और अमेरिका के पास ऊर्जा के पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान शर्तों को नहीं मानता है, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। दूसरी ओर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ इजराइल का अभियान जारी रहेगा। नेतन्याहू ने कहा कि उनका नेतृत्व ईरान के 'आतंकवादी शासन' और उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा।

प्रतिनिधिमंडल को लेकर कूटनीतिक विवाद

ईरान ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की संरचना पर भी आपत्ति जताई है। ईरानी उपराष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिकी टीम में दो गुट हैं—एक 'अमेरिका फर्स्ट' और दूसरा 'इजराइल फर्स्ट'। ईरान का आरोप है कि जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ जैसे सदस्य इजराइल के हितों का समर्थन करते हैं, इसलिए ईरान उनके साथ बातचीत करने में संकोच कर रहा है। ईरान ने जेडी वेंस के साथ बातचीत को प्राथमिकता दी है, जिन्हें वे 'अमेरिका फर्स्ट' टीम का हिस्सा मानते हैं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को दुनिया के लिए 'मेक या ब्रेक' क्षण बताया है।