ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद, अमेरिका लौटा सकता है ₹16 लाख करोड़

अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए आपातकालीन टैरिफ की वसूली रोक दी है। इस फैसले से अमेरिकी सरकार को लगभग $175 अरब (₹15.75 लाख करोड़) वापस करने पड़ सकते हैं। यह रोक IEEPA कानून के तहत लगाए गए शुल्कों पर लागू होगी।

अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए आपातकालीन टैरिफ की वसूली को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है और यह निर्णय अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है जिसमें इन टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया गया था। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए शुल्कों की वसूली मंगलवार रात 12 बजकर 1 मिनट (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से प्रभावी रूप से रोक दी गई है। एजेंसी ने सभी आयातकों को निर्देश दिया है कि वे अपने कार्गो सिस्टम से इन टैरिफ से संबंधित सभी कोड हटा दें।

वित्तीय प्रभाव और रिफंड की संभावना

पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ सकता है और 75 लाख करोड़) से अधिक की राशि कंपनियों को वापस करनी पड़ सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, IEEPA के तहत लगाए गए इन टैरिफ से अमेरिकी खजाने में प्रतिदिन $50 करोड़ (लगभग ₹4,500 करोड़) से अधिक की आय हो रही थी। अब इन शुल्कों के रद्द होने के बाद, प्रभावित कंपनियां और आयातक कानूनी तौर पर रिफंड की मांग करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिक्रिया और भविष्य की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि इस फैसले ने अनजाने में उन्हें पहले से अधिक अधिकार दे दिए हैं। ट्रम्प ने अदालत के फैसले को 'मूर्खतापूर्ण' बताते हुए कहा कि वह अन्य कानूनों के तहत टैरिफ लगाने की अपनी शक्ति का और अधिक सख्ती से इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी देश ने व्यापार समझौतों के नाम पर अमेरिका के साथ अनुचित व्यवहार किया, तो उन पर और भी ऊंचे टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि वह भविष्य में लाइसेंसिंग जैसे वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करके व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकते हैं।

जारी रहने वाले टैरिफ और कानूनी प्रावधान

यह स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर ही लागू होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर 'सेक्शन 232' और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ 'सेक्शन 301' के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ पहले की तरह जारी रहेंगे। सेक्शन 232 के तहत, राष्ट्रपति को उन आयातों पर शुल्क लगाने का अधिकार है जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं, जैसे स्टील और एल्युमिनियम। वहीं, सेक्शन 301 का उपयोग बौद्धिक संपदा की चोरी या भेदभावपूर्ण व्यापार नीतियों के खिलाफ किया जाता है, जिसका मुख्य प्रभाव चीन से होने वाले आयात पर पड़ता है।

भारत पर प्रभाव और 15% ग्लोबल टैरिफ की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, ट्रम्प प्रशासन ने सेक्शन 122 के तहत एक नया 15% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। इस नए नियम के दायरे में भारत सहित दुनिया के सभी देश आएंगे। भारतीय निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि पिछले एक वर्ष में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले करों में कई बार बदलाव किए हैं। पहले यह दर 26% से 50% के बीच थी, जिसे बाद में घटाकर 18% किया गया था और अब यह 15% के स्तर पर आ गई है। सेक्शन 122 के तहत यह व्यवस्था 150 दिनों तक प्रभावी रह सकती है, जिसके बाद इसे जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी।

सीमा शुल्क विभाग के तकनीकी निर्देश

CBP ने व्यापारिक समुदाय के लिए विस्तृत तकनीकी निर्देश जारी किए हैं ताकि कार्गो प्रोसेसिंग में कोई बाधा न आए। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ वसूली बंद करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कार्गो सिस्टम में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। हालांकि, विभाग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पिछले तीन दिनों के दौरान वसूले गए टैरिफ का क्या होगा और रिफंड की प्रक्रिया कब और कैसे शुरू की जाएगी। CBP ने कहा है कि वह आधिकारिक संदेशों के माध्यम से आयातकों और निर्यातकों को आगे की जानकारी प्रदान करना जारी रखेगा।