Zoom News : Sep 13, 2022, 11:16 PM
New Delhi : कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी, अगर समय पर रणनीति लागू की जाती... संसदीय पैनल ने स्थिति की गंभीरता का अनुमान लगाने में सक्षम नहीं होने के लिए सरकार की खिंचाई करते हुए यह कहा है। स्वास्थ्य पर संसदीय स्थायी समिति ने राज्यसभा में पेश अपनी 137वीं रिपोर्ट में कहा कि दूसरी लहर निस्संदेह ज्यादा मामले, बढ़ती हुई मौतें, अस्पतालों में ऑक्सीजन और बिस्तरों की कमी, दवाओं और अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की आपूर्ति में कमी काफी परेशान करने वाली थीं। आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, ऑक्सीजन सिलेंडरों और दवाओं आदि की जमाखोरी और कालाबाजारी आदि इसका प्रमुख कारण थे।पीटीआई के अनुसार, संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "समिति का विचार है कि यदि सरकार प्रारंभिक चरण में आबादी में वायरस की पहचान करने में सफल रहती और अपनी नियंत्रण पाने के लिए रणनीति को उपयुक्त रूप से लागू किया जाता, तो नतीजे कम गंभीर होते और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।" समिति ने पाया कि भारत दुनिया में कोरोना मामलों के सबसे अधिक दुष्परिणाम वाले देशों में से एक है। देश की आबादी की विशालता ने महामारी के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की। समिति ने कहा कि नाजुक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी के कारण देश में जबरदस्त दबाव देखा गया। इसमें यहां यह भी नोट किया गया कि सरकार महामारी और उसके बाद की लहरों के संभावित पुनरुत्थान की गंभीरता का सटीक अनुमान नहीं लगा पाई।