पश्चिम एशिया संकट: भारत में गैस आपूर्ति बाधित, मोरबी की फैक्ट्रियां बंद

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत में गैस आपूर्ति बाधित हुई है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। गुजरात के मोरबी में 100 से अधिक फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं और पुणे में गैस आधारित श्मशान घाटों का संचालन प्रभावित हुआ है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पिछले 10 दिनों से जारी इस अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन गैस की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ा है। तेल विपणन कंपनियों ने हाल ही में रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिससे आम उपभोक्ताओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की वृद्धि हुई है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम ₹115 तक बढ़ गए हैं। यह संकट केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक उत्पादन और नागरिक सेवाओं को भी बाधित कर रहा है।

गैस आयात और समुद्री मार्ग की चुनौतियां

भारत अपनी कुल गैस आवश्यकता का लगभग 60% हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। यह आयात मुख्य रूप से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के रूप में विशाल टैंकर जहाजों के माध्यम से किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, 1 मार्च से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण इन जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण बीमा लागत और माल ढुलाई की दरों में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर भारत में गैस की लैंडिंग लागत पर पड़ा है।

मोरबी के सिरेमिक उद्योग पर गहरा संकट

गुजरात का मोरबी, जो दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक विनिर्माण केंद्रों में से एक माना जाता है, इस गैस संकट की मार सबसे अधिक झेल रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, ईंधन आपूर्ति में आई रुकावट और बढ़ती लागत के कारण मोरबी में लगभग 100 सिरेमिक फैक्ट्रियों ने अपना उत्पादन पूरी तरह से बंद कर दिया है। सिरेमिक टाइल्स और सैनिटरीवेयर के निर्माण में गैस का उपयोग भट्टियों (Kilns) को चलाने के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है और मोरबी के उद्योग संघों ने चेतावनी दी है कि यदि गैस आपूर्ति की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में 400 से अधिक अन्य इकाइयां भी बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। उत्पादन ठप होने से न केवल निर्यात ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि हजारों श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट मंडरा रहा है।

पुणे में नागरिक सेवाओं और श्मशान घाटों पर असर

गैस की कमी का प्रभाव महाराष्ट्र के पुणे शहर में नागरिक सेवाओं पर भी पड़ा है। पुणे नगर निगम (PMC) ने ईंधन की अनुपलब्धता के कारण शहर के 18 गैस आधारित शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैस आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान के कारण इन केंद्रों का संचालन करना वर्तमान में संभव नहीं है। प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने तक वैकल्पिक व्यवस्थाओं का उपयोग करने का निर्देश दिया है। यह स्थिति दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष किस प्रकार स्थानीय स्तर पर बुनियादी नागरिक सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है।

कोलकाता में इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग में उछाल

रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और भविष्य में आपूर्ति की अनिश्चितता ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बदलाव लाया है और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों, विशेष रूप से इंडक्शन कुकर की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। चांदनी मार्केट और एज्रा स्ट्रीट जैसे प्रमुख खुदरा बाजारों के व्यापारियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में तीन गुना तक का उछाल आया है। उपभोक्ता अब गैस पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली आधारित विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव मध्यम वर्गीय परिवारों में बजट प्रबंधन की कोशिशों का हिस्सा है।

ईंधन कीमतों का नया ढांचा और सरकारी रुख

तेल कंपनियों द्वारा की गई कीमतों में बढ़ोतरी के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में गैस की दरें बदल गई हैं। 2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग ₹913 हो गई है। इसी तरह, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹115 की वृद्धि ने होटल और रेस्तरां उद्योग की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि आम जनता को गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और स्रोतों की भी तलाश कर रही है ताकि पश्चिम एशिया पर निर्भरता के जोखिम को कम किया जा सके।