ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें: इस्तीफे, गिरफ्तारी और बुलडोजर एक्शन से घिरी तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य की नई भाजपा सरकार द्वारा अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने, नेताओं की गिरफ्तारी और बड़े पैमाने पर हो रहे इस्तीफों ने पार्टी को संकट में डाल दिया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक फिजाओं में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए समय काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से ही राज्य में टीएमसी कार्यकर्ताओं के इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है, वहीं दूसरी ओर अवैध रूप से बनाए गए पार्टी कार्यालयों और इमारतों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की जा रही है। चुनाव में पार्टी की हार और अपनी व्यक्तिगत सीट गंवाने के बाद ममता बनर्जी अब चौतरफा संकटों से घिरी नजर आ रही हैं।

अवैध निर्माणों पर बुलडोजर का प्रहार

राज्य की नई सरकार ने अवैध निर्माणों को चिन्हित कर उन्हें गिराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। हुगली जिले के कोननगर इलाके में सोमवार को टीएमसी के एक कार्यालय को जमींदोज कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यालय सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया था। बताया जा रहा है कि इस कार्यालय का निर्माण स्थानीय टीएमसी पार्षद खोकोन पाल द्वारा करवाया गया था, जिसके चलते प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इसे ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई राज्य में अवैध कब्जों के खिलाफ सरकार के कड़े रुख को दर्शाती है।

कोलकाता के विभिन्न इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिल रही है और रविवार 24 मई को कोलकाता के बेलेघाटा, बोसपुकुर, तिलजला और कस्बा जैसे क्षेत्रों में बुलडोजर तैनात किए गए। इन कार्रवाइयों का मुख्य उद्देश्य उन अवैध बहुमंजिला इमारतों को गिराना था, जिनका संबंध कथित तौर पर टीएमसी के वर्तमान या पूर्व नेताओं और स्थानीय बाहुबलियों से है। कस्बा क्षेत्र के विधायक जावेद खान के स्वामित्व वाली एक इमारत को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और प्रशासन ने उनसे इमारत के वैध दस्तावेज पेश करने को कहा है और चेतावनी दी है कि यदि कागजात सही नहीं पाए गए, तो सोमवार से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, विधायक जावेद खान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उनकी इमारत के निर्माण में कोई कानूनी अड़चन नहीं है।

सरकार की सख्त कार्रवाई और जांच का दायरा

कोलकाता में ध्वस्तीकरण स्थलों का दौरा करते हुए मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने सरकार की मंशा साफ कर दी। उन्होंने कहा कि सरकार उन सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो अवैध निर्माण की देखरेख के लिए जिम्मेदार थे, जिन्होंने इसे बनाया और इसमें पैसा लगाया। इसी तरह की कार्रवाई रविवार को पुरुलिया और खानाकुल सहित राज्य के कई अन्य जिलों में भी देखने को मिली। 4 मई को भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही अवैध ढांचों को गिराने और टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी की घटनाओं में तेजी आई है।

जांच का यह घेरा टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व तक भी पहुंच रहा है। दो दिन पहले सोमवार को पुलिस की एक टीम टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर सुरक्षा उपकरण लेने पहुंची थी। हालांकि कोलकाता पुलिस ने इसे एक नियमित प्रक्रिया बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इसके अलावा, कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कई संपत्तियों को नोटिस भेजकर स्वीकृत योजना से हटकर किए गए निर्माण पर जवाब मांगा है। पिछले 3 हफ्तों से स्थानीय टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला भी लगातार जारी है।

इस्तीफों की लहर और आंतरिक कलह

टीएमसी के लिए एक और बड़ी मुसीबत पार्टी के भीतर से आ रही है। राज्य में 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद अब पार्टी सत्ता से बाहर है, लेकिन कई नगर पालिकाओं और पंचायतों में अभी भी उसका नियंत्रण है। हालांकि, अब यह पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है। भाटपारा नगर पालिका में चेयरमैन सहित कम से कम 30 पार्षदों ने सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। डायमंड हार्बर नगर पालिका में भी 16 में से 8 पार्षदों के इस्तीफे की खबर है। हलीसहर, कांथी, उत्तर बैरकपुर और गारुलिया जैसी नगर पालिकाओं में भी आधे से अधिक पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है।

पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इलाके में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी तो ली, लेकिन साथ ही पार्टी के कामकाज के तरीके और चुनाव में आई-पैक (I-PAC) की भूमिका की तीखी आलोचना भी की। यह आंतरिक असंतोष ममता बनर्जी के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है।

गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजा

कानूनी मोर्चे पर भी टीएमसी नेताओं की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। बीरभूम के सूरी इलाके में एक स्थानीय पार्षद के पति बप्पादित्य दास को गिरफ्तार किया गया है। वहीं बर्धमान से टीएमसी नेता अभिषेक दा को रंगदारी और धमकी देने के आरोप में पकड़ा गया है। राज्य के अलग-अलग जिलों से अब तक कम से कम एक दर्जन पार्षदों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई अन्य से लंबी पूछताछ की जा रही है।

इन तमाम कार्रवाइयों पर ममता बनर्जी ने 24 मई को शुभेंदु सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बुलडोजर एक्शन, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और चुनाव के बाद लोगों को परेशान करने के आरोपों पर सरकार की कड़ी आलोचना की। हालांकि, पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं ने इन मुद्दों पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। स्थानीय निकायों के सदस्यों के साथ छोड़ने और कानूनी कार्रवाइयों के बीच टीएमसी खुद को बचाने के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है।