पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है और विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही उथल-पुथल अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी में अपने साथ हुए व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करने के बाद पार्टी के जिला पदाधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते और अस्थिर होते दिख रहे हैं।
कल्याणी में मुख्यमंत्री के साथ दिखीं काकोली घोष
टीएमसी में चल रही इस उथल-पुथल को और गहरा करने वाली एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तस्वीर मंगलवार को सामने आई। कल्याणी में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस आधिकारिक मंच पर काकोली घोष दस्तीदार की मौजूदगी ने सभी को चौंका दिया। यह दृश्य उस समय सामने आया है जब टीएमसी अपने संगठनात्मक ढांचे को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। काकोली घोष का भाजपा सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होना उनके भविष्य के राजनीतिक कदम की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है।
6 विधायकों ने भी दिखाई बगावत
इस बैठक में केवल काकोली घोष ही नहीं, बल्कि उनके साथ टीएमसी के 6 अन्य विधायक भी शामिल हुए। बारासात सांसद के अलावा, इस महत्वपूर्ण बैठक में देगंगा से टीएमसी विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन मौजूद थे। इनके साथ ही बसीरहाट क्षेत्र के 3 अन्य विधायक भी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। कुल मिलाकर 7 बड़े चेहरों का एक साथ मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होना तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
कल्याण बनर्जी का तीखा तंज
ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली काकोली घोष दस्तीदार के इस कदम पर टीएमसी के भीतर से ही तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने काकोली घोष पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, "आपकी आगे की यात्रा सुगम और सुखद हो। आपको और आपके परिवार को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। शायद अब आखिरकार आपसे जुड़े सभी दाग और विवाद हमेशा के लिए मिटा दिए जाएंगे। शुभकामनाएं। " कल्याण बनर्जी का यह बयान पार्टी के भीतर व्याप्त कड़वाहट को साफ तौर पर दर्शाता है।
टीएमसी के लिए बढ़ती मुश्किलें
विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष के स्वर उठ रहे थे, लेकिन काकोली घोष और 6 विधायकों का इस तरह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ खड़ा होना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बसीरहाट, देगंगा, स्वरूपनगर और हारोआ जैसे क्षेत्रों के विधायकों का पाला बदलना पार्टी की जमीनी पकड़ पर भी सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी में हो रही इस बड़ी टूट को रोकने के लिए क्या कदम उठाती हैं और क्या अन्य विधायक भी इसी राह पर चलते हैं।
