एक समय था जब 'अमेरिकन ड्रीम', डॉलर की चमक, सिलिकॉन वैली की नौकरी और बड़ा घर लाखों भारतीयों का सपना हुआ करता था। लेकिन अब कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की 2026 की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सर्वे के मुताबिक, 10 में से 4 भारतीय-अमेरिकी अब अमेरिका छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। 5% होने के बावजूद वहां के टैक्स बेस में 6% का योगदान देता है। फरवरी और अप्रैल 2026 के बीच जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि यह 'सबसे कामयाब माइनॉरिटी' अब खुद को वहां असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रही है।
राजनीतिक ध्रुवीकरण और ट्रंप प्रशासन का प्रभाव
सर्वेक्षण में पलायन की इच्छा रखने वाले 58% लोगों ने 'राजनीतिक माहौल' को सबसे बड़ी वजह बताया है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका में ध्रुवीकरण काफी बढ़ा है, जिससे 71% भारतीय-अमेरिकी उनके कामकाज से असंतुष्ट हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक समावेश और अपनेपन की भावना में आई कमी ने भारतीयों को बेचैन कर दिया है और राजनीतिक झुकाव में भी बड़ा बदलाव देखा गया है; 2020 में जहां 52% भारतीय खुद को डेमोक्रेट मानते थे, अब वह गिरकर 46% रह गया है। वहीं, 30% भारतीय अब 'इंडिपेंडेंट' विचारधारा की ओर झुक रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन 19% पर स्थिर है।
इमिग्रेशन का संकट और 70 साल का लंबा इंतजार
भारतीयों के लिए अमेरिका में बसने की सबसे बड़ी बाधा वहां का 'ब्रोकन इमिग्रेशन सिस्टम' है।
महंगाई और सुरक्षा की बढ़ती चिंताएं
आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका अब पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा। सर्वे में 21% लोगों ने महंगाई और 17% ने नौकरी को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया है। 5 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। सैन फ्रांसिस्को, सिएटल और न्यूयॉर्क जैसे टेक हब में एक बेडरूम के अपार्टमेंट का किराया $3,000 से $5,000 प्रति माह है। इसके अलावा, ऑनलाइन और कार्यस्थलों पर 'बौद्धिक भेदभाव' और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने भी भारतीयों के मोहभंग में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत का आर्थिक उत्थान और रिवर्स माइग्रेशन
दूसरी ओर, भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था एक नए आकर्षण के रूप में उभरी है। 5% रहने का अनुमान है। 3 ट्रिलियन हो गई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर अब ग्लोबल टेक्नोलॉजी हब बन चुके हैं, जहां सिलिकॉन वैली जैसा वेतन और सुविधाएं उपलब्ध हैं। सर्वे के अनुसार, अमेरिका छोड़ने की सोच रहे लोग न केवल भारत, बल्कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों का विकल्प भी तलाश रहे हैं।
