भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी जीवनशैली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का खुलासा किया है। एक हालिया साक्षात्कार में चहल ने बताया कि उन्होंने पिछले छह महीनों से शराब का सेवन पूरी तरह से बंद कर दिया है। 35 वर्षीय खिलाड़ी ने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर एबी डिविलियर्स के यूट्यूब शो के दौरान यह जानकारी साझा की। चहल के अनुसार, इस निर्णय के पीछे का मुख्य उद्देश्य उनकी शारीरिक फिटनेस को बनाए रखना और खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को 150 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी होने के नाते वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में युवाओं के लिए एक उदाहरण पेश करना चाहते हैं।
जीवनशैली में बदलाव और फिटनेस का लक्ष्य
युजवेंद्र चहल ने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ एथलीटों के लिए रिकवरी और फिटनेस अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अपनी पुरानी चोटों का भी जिक्र किया, जिन्होंने अतीत में उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया था। चहल के अनुसार, इस साल उनका प्राथमिक ध्यान अपने शरीर की देखभाल करना और पूरे आईपीएल टूर्नामेंट के दौरान खुद को फिट रखना है। उन्होंने कहा कि शराब छोड़ने का निर्णय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसके सकारात्मक परिणाम अब उनकी फिटनेस और ऊर्जा के स्तर में दिखाई दे रहे हैं। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, एक पेशेवर एथलीट के लिए शराब का त्याग करना मांसपेशियों की रिकवरी और सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक होता है।
मेटाबॉलिक रीसेट और शारीरिक परिवर्तन
होलिस्टिक डायटिशियन और इंटेरोगेटिव थेरप्यूटिक न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर गीतिका चोपड़ा के अनुसार, जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से शराब छोड़ देता है, तो शरीर में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित बदलाव आते हैं। डॉक्टर चोपड़ा इसे 'मेटाबॉलिक रीसेट' की संज्ञा देती हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव केवल लिवर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। शराब छोड़ने के शुरुआती हफ्तों में ही शरीर अपनी प्राकृतिक प्रणालियों को पुनर्गठित करना शुरू कर देता है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और विषाक्त पदार्थों का निष्कासन तेज हो जाता है।
नींद की गुणवत्ता और ऊर्जा के स्तर में सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार, शराब छोड़ने के बाद शरीर में सबसे पहला और महत्वपूर्ण बदलाव नींद की गुणवत्ता में आता है। हालांकि शराब के सेवन से शुरुआत में नींद जल्दी आ सकती है, लेकिन यह 'डीप स्लीप' या गहरी नींद के चक्र को बाधित करती है और डॉक्टर गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि शराब के बिना शरीर प्राकृतिक नींद के चक्र को बहाल करता है। इससे सुबह उठने पर व्यक्ति अधिक तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है। गहरी नींद न केवल शारीरिक रिकवरी के लिए आवश्यक है, बल्कि यह एथलीटों के संज्ञानात्मक कार्यों और निर्णय लेने की क्षमता को भी बेहतर बनाती है।
लिवर रिकवरी और पाचन तंत्र का सुदृढ़ीकरण
लिवर शरीर का मुख्य अंग है जो शराब को डिटॉक्स करने का कार्य करता है। निरंतर शराब के सेवन से लिवर हमेशा तनाव में रहता है। डॉक्टर चोपड़ा के अनुसार, शराब छोड़ने के बाद लिवर को खुद को रिपेयर करने का समय मिलता है। इससे फैटी लिवर की समस्या कम होने लगती है और लिवर के एंजाइम संतुलित हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, शराब पाचन तंत्र की परत (gut lining) को उत्तेजित करती है, जिससे एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं होती हैं। शराब छोड़ने से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, जो शरीर के समग्र पोषण स्तर को बढ़ाता है।
हार्मोनल संतुलन और मानसिक स्पष्टता
शराब का सेवन शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को बढ़ाता है और प्रजनन हार्मोन को असंतुलित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शराब छोड़ने से हार्मोन स्थिर होते हैं, जिससे मूड स्विंग्स में कमी आती है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। डॉक्टर गीतिका चोपड़ा का कहना है कि हार्मोनल संतुलन से त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार होता है और मानसिक तनाव कम होता है। यह भावनात्मक स्थिरता और फोकस को बेहतर बनाने में मदद करता है, जो किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के लिए मैदान पर सटीक निर्णय लेने के लिए अनिवार्य है। वजन प्रबंधन के संदर्भ में, शराब छोड़ने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
