साल 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प के बाद पहली बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। " यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालातों और चुनौतियों के बीच दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से की गई है।
शी जिनपिंग ने वैश्विक जिम्मेदारियों पर दिया जोर
द्विपक्षीय बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन की साझा जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात, जिनमें कई तरह के बदलाव और चुनौतियां शामिल हैं, उन्हें देखते हुए दुनिया के दो सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों और 'ग्लोबल साउथ' के अहम सदस्य होने के नाते चीन और भारत की बड़ी ज़िम्मेदारियां हैं। जिनपिंग ने इस बात पर बल दिया कि दोनों पक्षों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए काम करना चाहिए।
ब्रिक्स ढांचे और आर्थिक वैश्वीकरण पर चर्चा
राष्ट्रपति जिनपिंग ने बड़े ब्रिक्स (BRICS) ढांचे के भीतर उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि हमें एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया और समावेशी व आपसी फ़ायदे वाले आर्थिक वैश्वीकरण का समर्थन करना चाहिए और उनके अनुसार, इससे विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में और अधिक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकेगा। यह बयान दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग की संभावनाओं को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट और तीन 'आपसी' सिद्धांत
भारत के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि पीएम मोदी और शी जिनपिंग ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली मुलाकात के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नज़रिए से देखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने संबंधों की मजबूती के लिए तीन 'आपसी' बातों का पालन करने पर ज़ोर दिया, जिनमें आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित सर्वोपरि होने चाहिए।
सात साल बाद आगमन और व्यापारिक आंकड़े
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर कदम रखा है। पालम एयरपोर्ट पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका औपचारिक स्वागत किया। 15 जून 2020 को हुई गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। हालांकि सीमा पर तनाव बना रहा, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार में निरंतर वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में चीन से भारत का आयात लगभग 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है। इसका अर्थ है कि गलवान झड़प के बाद से चीन से होने वाला आयात दोगुना हो गया है, जो द्विपक्षीय संबंधों के आर्थिक पहलू की गहराई को दर्शाता है।