उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान की कथित चोरी का मामला अब काफी गरमा गया है। इस घटना से भारत के करोड़ों राम भक्त दुखी हैं और उनके मन में उन लोगों के खिलाफ गहरा गुस्सा है जिन्होंने मंदिर के चढ़ावे में सेंध लगाई। भक्तों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि 2 करोड़ रुपये की रिकवरी होने और SIT द्वारा जांच शुरू किए जाने के बावजूद अब तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। सवाल उठ रहे हैं कि 10 दिन बीत जाने और 3 शिकायतें मिलने के बाद भी FIR दर्ज करने से कौन रोक रहा है और इस देरी के पीछे असली वजह क्या है।
SIT की 8 घंटे की मैराथन जांच
पिछले कुछ दिनों से चल रहे आरोपों और बयानों के दौर के बाद अब जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। SIT की टीम ने सोमवार को दोपहर बाद 2 बजकर 50 मिनट पर अपनी जांच शुरू की और देर रात करीब 10 बजकर 30 मिनट तक राम मंदिर परिसर में डटी रही। लगभग 8 घंटे तक चली इस जांच के दौरान SIT ने सभी दान पात्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। टीम ने दान पात्र से कैश निकालने और उसकी गिनती (काउंटिंग) की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। इसके अलावा SIT ने वर्ष 2021 से लेकर अब तक के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की है।
36 लोगों से पूछताछ और बैंक कर्मियों पर शिकंजा
चढ़ावा चोरी के इस गंभीर मामले में SIT ने अब तक 36 लोगों से पूछताछ की है। इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी और बैंक के कर्मचारी भी शामिल हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपालजी राव से टीम ने 2 घंटे से भी ज्यादा समय तक सवाल-जवाब किए। हालांकि पहले दिन की लंबी जांच के बाद भी अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एक तरफ जहां जांच की रफ्तार बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस को अब लिखित शिकायतें भी मिलने लगी हैं। पिछले 24 घंटों में इस घोटाले को लेकर 3 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनसे कई बड़े खुलासे हुए हैं।
शिकायतों में 200 करोड़ रुपये की हेराफेरी का दावा
इस मामले में अब तक 3 प्रमुख शिकायतें सामने आई हैं। पहली शिकायत राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतोष दुबे ने की है, जिसमें उन्होंने चढ़ावे के साथ-साथ कीमती शिलाएं चोरी होने का भी आरोप लगाया है। दूसरी शिकायत यूपी करणी सेना के प्रमुख अभिनव सिंह ने और तीसरी यूथ कांग्रेस की ओर से दर्ज कराई गई है। इन शिकायतों में दावा किया गया है कि मंदिर के चढ़ावे से बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और आभूषण गायब किए गए हैं और आरोप है कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की है। शिकायतों में चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपालजी राव और राम शंकर यादव ऊर्फ टिन्नू के नामों का उल्लेख करते हुए उनके पॉलीग्राफ टेस्ट और गिरफ्तारी की मांग की गई है।
राम शंकर यादव ऊर्फ टिन्नू की सफाई
इस पूरे विवाद के केंद्र में रहे राम शंकर यादव ऊर्फ टिन्नू ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चंपत राय के करीबी होने के कारण उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। टिन्नू ने कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं और प्रशासन चाहे तो उनकी संपत्ति की जांच करा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में हर जगह सीसीटीवी लगे हैं और वह अभी भी मंदिर आते-जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका भतीजा मनीष मंदिर में काम करता था और वह SIT की जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
घोटाले के 6 मुख्य किरदार
जांच और शिकायतों के आधार पर इस घोटाले में अब तक 6 मुख्य नाम उभरकर सामने आए हैं। पहला नाम लवकुश मिश्रा का है, जो गणना टीम का सदस्य है और जिसके घर से 5 लाख रुपये बरामद होने की बात कही जा रही है। दूसरा किरदार अनुकल्प मिश्रा है, जो गणना टीम का हेड है और अनिल मिश्रा का भतीजा है। उसने हाल ही में 65 लाख रुपये में एक मकान खरीदा है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। तीसरा नाम राम शंकर यादव ऊर्फ टिन्नू का है, जो चंपत राय का करीबी है और बैंक मैनेजमेंट का काम देखता है। चौथा किरदार मनीष यादव है, जो टिन्नू का भतीजा है। पांचवां नाम करुण का है, जो गिनती टीम से जुड़ा है और जिसकी संपत्ति में अचानक वृद्धि का शक है। छठा नाम अवनीश मिश्रा का है, जो प्रबंधन और गिनती की प्रक्रिया में शामिल रहा है।
विपक्ष की मांग और केंद्रीय मंत्री का रुख
इस मामले ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। कांग्रेस ने SIT की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के जज से कराने की मांग की है। वहीं धर्मगुरुओं ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि ट्रस्ट में ऐसे धार्मिक लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जिन्हें ईश्वर और धर्म का भय हो। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी इस घटना को अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी करने वालों को किसी भी कीमत पर क्षमा नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
पुराने विवादों की यादें हुई ताजा
राम मंदिर से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है। इससे पहले वर्ष 2021 और 2022 में जमीन अधिग्रहण के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 208 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद हुआ था, जिसे सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा था और महज कुछ मिनटों बाद उसे ट्रस्ट को 18 करोड़ 50 लाख रुपये में बेच दिया गया था। इसी तरह अयोध्या के मेयर के एक रिश्तेदार ने 20 लाख रुपये में खरीदी जमीन को 2 करोड़ 50 लाख रुपये में ट्रस्ट को बेचा था। हालांकि तब ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी बताया था, लेकिन अब चढ़ावा चोरी के नए आरोपों ने भक्तों की चिंता को फिर से बढ़ा दिया है।
