कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने जीते स्वर्ण पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है। हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने अपने-अपने भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया है। हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बन गए हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। भारत के लिए यह दिन बेहद गौरवशाली रहा क्योंकि एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक देश की झोली में आए। सबसे पहले अस्मिता डे ने भारत को स्वर्ण पदक जिताया और उसके कुछ ही देर बाद हर्ष सिंह ने भी स्वर्णिम सफलता हासिल की और यह पहली बार है जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक जीते हैं, जो भारतीय खेलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

हर्ष सिंह का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक

हर्ष सिंह ने 60 किलो भार वर्ग में खेलते हुए एकतरफा अंदाज में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में हर्ष का सामना ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज से हुआ, जिन्हें उन्होंने 10-0 के अंतर से हराकर खिताबी जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो को एक नई पहचान दी है और यह जीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके बढ़ते कद को दर्शाती है।

स्वर्ण पदक तक का सफर: हर्ष सिंह की चुनौतियां

हर्ष सिंह का स्वर्ण पदक तक का सफर बेहद प्रभावशाली रहा और उन्होंने हर मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में चिकोंडी काथेवेरा को 100-0 के बड़े अंतर से हराकर अपने इरादे साफ कर दिए थे। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला वानुअतु के एलन मोंटौएल से हुआ, जिन्हें उन्होंने एकतरफा अंदाज में मात दी। सेमीफाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस अंटुन नेटॉ को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल में एक बार फिर उनका सामना ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोशुआ काट्ज से हुआ, जहां हर्ष ने 10-0 से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

अस्मिता डे की स्वर्णिम कामयाबी

हर्ष सिंह से पहले अस्मिता डे ने 48 किग्रा भार वर्ग में भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रचा था। अस्मिता ने फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वैच के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। यह मुकाबला काफी रोमांचक रहा और अंततः गोल्डन स्कोर में अस्मिता ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को हराकर स्वर्ण पदक जीता। अस्मिता की इस जीत ने भारतीय खेमे में उत्साह भर दिया था, जिसे बाद में हर्ष सिंह ने दूसरे स्वर्ण पदक के साथ दोगुना कर दिया। यह पहली बार है जब भारत ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में दो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

हर्ष सिंह का करियर और अनुभव

हर्ष सिंह घरेलू स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते रहे हैं और इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने नेशनल सेलेक्शन प्रोसेस के जरिए कॉमनवेल्थ गेम्स की टीम में अपनी जगह पक्की की थी। हालांकि हर्ष सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत ज्यादा अनुभव नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया है और इससे पहले वह कजाकिस्तान बारीसी ग्रैंड स्लैम 2026 में 7वें स्थान पर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने टोक्यो ग्रैंड स्लैम, ताशकंद ग्रैंड स्लैम और एशियन सीनियर चैंपियनशिप जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिससे उन्हें इस बड़े मंच पर सफलता हासिल करने में मदद मिली।