कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास में मुक्केबाजी के लिए एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। इस विशेष दिन पर भारतीय मुक्केबाजों ने रिंग के भीतर अपने मुक्कों का लोहा मनवाते हुए पदकों की झड़ी लगा दी। भारत के लिए यह दिन बेहद सफल रहा क्योंकि देश ने कुल पांच स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जिनमें से अकेले मुक्केबाजी स्पर्धा से 4 स्वर्ण पदक आए। भारतीय मुक्केबाजों के इस असाधारण प्रदर्शन ने पदक तालिका में भारत की स्थिति को और भी मजबूत कर दिया है।
साक्षी चौधरी का रिंग में एकतरफा दबदबा
महिला 51 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत की स्टार मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने अपनी तकनीक और आक्रामकता का बेहतरीन नमूना पेश किया। उनका मुकाबला इंग्लैंड की मुक्केबाज रुबी व्हाइट से था। साक्षी ने मैच की शुरुआत से ही अपनी प्रतिद्वंद्वी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने मुकाबले के तीनों ही राउंड में अपना पूरा नियंत्रण बनाए रखा और रुबी व्हाइट को वापसी करने का एक भी मौका नहीं दिया। साक्षी की फुर्ती और सटीक पंचों के सामने इंग्लैंड की मुक्केबाज बेबस नजर आईं।
मैच का परिणाम जब घोषित किया गया, तो जजों ने सर्वसम्मत फैसले में साक्षी को 5-0 से विजेता घोषित किया। जीत की घोषणा होते ही साक्षी चौधरी रिंग में खुशी से झूम उठीं और अपनी जीत का जश्न मनाने लगीं। दूसरी ओर, अपनी हार का आभास होते ही इंग्लैंड की रुबी व्हाइट काफी भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए। साक्षी की इस शानदार जीत ने भारत को मुक्केबाजी में दिन का तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया।
प्रिया घंघस की ऐतिहासिक वापसी
महिला 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में प्रिया घंघस का मुकाबला कनाडा की मैरी बाथेल अल अहमदी से हुआ। यह मुकाबला काफी रोमांचक और उतार-चढ़ाव भरा रहा और मैच के पहले राउंड में कनाडा की मुक्केबाज ने बेहतर खेल दिखाया और जजों का फैसला उनके पक्ष में रहा। हालांकि, एक राउंड पिछड़ने के बावजूद प्रिया ने अपना धैर्य नहीं खोया और जबरदस्त वापसी की।
दूसरे राउंड में प्रिया ने अपनी रणनीति बदली और अधिक आक्रामक होकर पंच बरसाए। उन्होंने दूसरा राउंड 4-1 के अंतर से अपने नाम किया। अंतिम राउंड में भी प्रिया का दबदबा कायम रहा और अंततः उन्होंने यह मुकाबला 4-1 के विभाजित (स्प्लिट) फैसले से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। प्रिया की इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने इस कॉमनवेल्थ गेम्स की मुक्केबाजी स्पर्धा में कुल चार स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल करने का गौरव प्राप्त किया।
प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया का स्वर्णिम प्रहार
मुक्केबाजी के अन्य मुकाबलों में भी भारतीय महिलाओं का जलवा बरकरार रहा और महिलाओं की 54 किलोग्राम श्रेणी के फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगाडो के खिलाफ रिंग में कदम रखा। प्रीति ने पूरे मैच के दौरान शानदार फुटवर्क और डिफेंस का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को 5-0 के बड़े अंतर से हराकर स्वर्ण पदक जीता।
वहीं, 57 किलोग्राम भार वर्ग में जैस्मिन लंबोरिया ने उत्तरी आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज माइकेला वॉल्श का सामना किया। जैस्मिन ने अपनी लंबाई और पहुंच का पूरा फायदा उठाते हुए माइकेला को संभलने का मौका नहीं दिया और जैस्मिन ने भी यह मुकाबला 5-0 के एकतरफा अंतर से जीतकर भारत की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाल दिया।
जादुमणि सिंह ने जीता रजत पदक
पुरुषों के वर्ग में भी भारत को सफलता मिली। 55 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में भारत के जादुमणि सिंह का सामना मेजबान ऑस्ट्रेलिया के मुक्केबाज जे डिक्सन से हुआ। जादुमणि ने रिंग में बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज को कड़ी टक्कर दी। हालांकि, कड़े मुकाबले के बाद उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। जादुमणि के इस पदक ने भारतीय मुक्केबाजी दल के सफल अभियान में एक और महत्वपूर्ण योगदान दिया।
