गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास: CWG में 5000 मीटर इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने

भारतीय धावक गुलवीर सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर रेस में कांस्य पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। 1 अगस्त का दिन भारतीय खेल जगत के लिए अत्यंत गौरवशाली रहा, जहां एक ओर बॉक्सिंग के विभिन्न मुकाबलों में स्वर्ण पदकों की बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर एथलेटिक्स के ट्रैक पर गुलवीर सिंह ने अपनी रफ्तार से दुनिया को चौंका दिया। गुलवीर सिंह इस इवेंट में पदक जीतने वाले भारत के पहले धावक बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का नाम एक ऐसी स्पर्धा में दर्ज करा दिया है जिसमें अब तक कोई भारतीय खिलाड़ी पोडियम तक नहीं पहुंच सका था।

बेहद रोमांचक रहा पदक का मुकाबला

5000 मीटर रेस का यह मेडल इवेंट दर्शकों के लिए बेहद रोमांचक साबित हुआ। 95 की टाइमिंग के साथ पूरा किया। इस रेस की प्रतिस्पर्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीसरे और चौथे स्थान के बीच का अंतर बहुत ही कम था। गुलवीर ने केन्या के धावक कॉर्नेलियस केम्बोई को पछाड़कर कांस्य पदक पर कब्जा किया। 04 सेकंड पीछे रह गए और चौथे स्थान पर रहे। 04 सेकंड का फासला ही गुलवीर की जीत और इतिहास रचने के बीच की कड़ी बना। इस जीत के साथ ही गुलवीर कॉमनवेल्थ गेम्स के एथलेटिक्स इतिहास में मल्टीपल मेडल यानी एक से अधिक पदक जीतने वाले भारत के पहले एथलीट भी बन गए हैं।

दो अलग-अलग स्पर्धाओं में जमाया धाक

गुलवीर सिंह के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सफर बेहद शानदार रहा है। 5000 मीटर में कांस्य पदक जीतने से पहले उन्होंने इसी प्रतियोगिता में 10000 मीटर रेस में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था, जहां उन्होंने सिल्वर मेडल यानी रजत पदक अपने नाम किया था। ट्रैक एंड फील्ड के दो अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण इवेंट्स में पदक जीतना उनकी असाधारण क्षमता को दर्शाता है और वह अब भारत के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दो अलग-अलग लंबी दूरी की दौड़ स्पर्धाओं में पदक हासिल किए हैं। उनकी इस सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स में लंबी दूरी की दौड़ के प्रति एक नया उत्साह भर दिया है।

सेना की भर्ती से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले 27 साल के गुलवीर सिंह की कहानी संघर्ष और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। उन्होंने दौड़ने की शुरुआत किसी अंतरराष्ट्रीय पदक के सपने के साथ नहीं, बल्कि भारतीय सेना में भर्ती होने के लक्ष्य के साथ की थी। उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2018 में वह भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। सेना में शामिल होने के बाद भी उन्होंने अपने दौड़ने के जुनून को कम नहीं होने दिया और निरंतर अभ्यास जारी रखा। इसी निरंतरता के कारण उन्हें एथलेटिक्स के बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। सेना के अनुशासन और उनकी व्यक्तिगत मेहनत ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

रिकॉर्ड्स के बादशाह हैं गुलवीर सिंह

गुलवीर सिंह का करियर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा हुआ है। साल 2022 के एशियन गेम्स में उन्होंने 10000 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया था और वहां भी वह कांस्य पदक जीतने में सफल रहे थे। इसके अलावा, उनके नाम एक बहुत ही खास रिकॉर्ड दर्ज है। साल 2026 में उन्होंने हाफ मैराथन को मात्र 59 मिनट 42 सेकंड में पूरा किया था। इस उपलब्धि के साथ वह पहले ऐसे भारतीय एथलीट बने जिन्होंने हाफ मैराथन की दूरी को एक घंटे से भी कम समय में तय किया और अलीगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर सेना में भर्ती होने और फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में दो-दो पदक जीतकर इतिहास रचने तक का गुलवीर का सफर हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है।