- भारत,
- 15-Jan-2026 01:53 PM IST
भारतीय सेना ने हाल ही में जयपुर में आयोजित सेना दिवस (15 जनवरी) के भव्य समारोह में अपनी सैन्य शक्ति और शौर्य का शानदार प्रदर्शन किया. इस ऐतिहासिक अवसर पर, सेना ने पहली बार दिल्ली के छावनी क्षेत्र से बाहर निकलकर परेड का आयोजन किया, जिसने राजस्थान की राजधानी जयपुर को एक विशेष पहचान दी और इस परेड की सलामी भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली, जहां सेना की विभिन्न टुकड़ियों ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया. इस विशेष परेड का एक प्रमुख आकर्षण भैरव बटालियन रही, जो भारतीय सेना की एक नई और अत्याधुनिक टुकड़ी है. इस बटालियन के जवानों ने पहली बार सेना दिवस की परेड में हिस्सा लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
भैरव बटालियन का गठन और उद्देश्य
भैरव बटालियन भारतीय सेना की एक नई श्रेणी की टुकड़ी है, जो अत्याधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से सुसज्जित है. भारतीय सेना ने पिछले वर्ष, 2025 में अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से तीन नई इकाइयों का गठन किया था. इन महत्वपूर्ण टुकड़ियों में रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी और भैरव बटालियन शामिल हैं. इन इकाइयों का निर्माण देश की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी कदम है. भैरव बटालियन को विशेष रूप से ऐसे अभियानों के लिए तैयार किया गया है जहां त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता होती है.रणनीतिक तैनाती और परिचालन क्षमताएं
भैरव बटालियन की प्रत्येक इकाई में लगभग 250 सैनिक शामिल होते हैं और ये सैनिक भारतीय सेना की विभिन्न शाखाओं से आते हैं, जिनमें इन्फ्रैंट्री (पैदल सेना), आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस (वायु रक्षा) और अन्य सहयोगी टुकड़ियों के सैन्यकर्मी शामिल होते हैं. यह बहुआयामी संरचना बटालियन को विभिन्न प्रकार के युद्ध परिदृश्यों. में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाती है. वर्तमान में, भारतीय सेना ने भैरव बटालियन की लगभग 15 इकाइयों को तैयार कर लिया है. सेना की भविष्य की योजना ऐसी कुल 25 बटालियन बनाने की है, जिससे यह. बटालियन भारतीय सेना के संगठनात्मक ढांचे का एक स्थायी और अभिन्न अंग बन जाएगी. भैरव बटालियन को विशेष रूप से उन संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है, जहां सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अधिक हैं और इन क्षेत्रों में राजस्थान, जम्मू, लद्दाख और पूर्वोत्तर भारत के राज्य शामिल हैं. इन स्थानों पर तैनाती का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रत्याशित स्थिति या दुश्मन की गतिविधियों का त्वरित और निर्णायक जवाब देना है. इस बटालियन को ऐसे अति महत्वपूर्ण अभियानों के लिए तैयार किया गया है जिनमें विभिन्न तरह के हालातों में तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता होती है. ये बटालियन अचानक हुए हमलों या बदलती परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने के लिए विशेष रूप से. प्रशिक्षित होती हैं, जिससे वे पूर्व नियोजित सैन्य कार्रवाई के बजाय त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आदर्श बन जाती हैं.प्रतीक चिह्न और आदर्श वाक्य
भैरव बटालियन का प्रतीक चिह्न अत्यंत प्रभावशाली और प्रतीकात्मक है. इसमें एक कोबरा की तस्वीर बनी है, जिसके साथ 'भैरव, अदृश्य, अदम्य' शब्द अंकित हैं. बटालियन के टीम कमांडर ने एनडीटीवी को बताया कि कोबरा का चुनाव इसलिए किया गया है क्योंकि यदि वह दुश्मन को काट ले तो उसकी मौत निश्चित है, और इसी प्रकार भैरव बटालियन दुश्मन के लिए काल के समान है. इस बटालियन का नाम भगवान शिव के रौद्र रूप 'भैरव' पर रखा गया है, जो शक्ति और विनाश का प्रतीक है. इसका आदर्श वाक्य (Motto) 'अभयम् भैरव' है, जिसका अर्थ है 'निर्भीक रक्षक' और इसके जवान 'राजा रामचंद्र की जय' और 'बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' जैसे पारंपरिक और प्रेरणादायक नारे भी लगाते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों और शौर्य परंपरा को दर्शाते हैं.'फाइट टुनाइट' की अवधारणा
भारतीय सेना के अनुसार, भैरव बटालियन को 'फाइट टुनाइट' की अवधारणा के तहत विकसित किया गया है. इसका अर्थ है कि यह बटालियन बहुत कम समय में, लगभग तत्काल, युद्ध के लिए तैयार रहने में सक्षम है और यह क्षमता बटालियन को किसी भी अप्रत्याशित खतरे या आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने की अनुमति देती है, जिससे दुश्मन को तैयारी का समय नहीं मिलता. यह त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता आधुनिक युद्ध के मैदान में एक महत्वपूर्ण सामरिक लाभ प्रदान करती है, जहां गति और तत्परता निर्णायक भूमिका निभाते हैं.स्पेशल फोर्सेज़ और नियमित सेना के बीच सेतु
भैरव बटालियन का गठन सेना ने अपनी स्पेशल फोर्सेज़ (विशिष्ट अभियानों में हिस्सा लेनेवाली टुकड़ियों). और नियमित सेना के बीच एक सेतु का काम करने के उद्देश्य से किया है. इस रणनीतिक कदम का मुख्य लक्ष्य स्पेशल फोर्सेज़ को बहुत ही ज़्यादा अहम और विशिष्ट अभियानों के लिए सुरक्षित रखना है, जबकि भैरव बटालियन अपेक्षाकृत कम जटिल लेकिन महत्वपूर्ण अभियानों को संभाल सके. यह बटालियन सेना की समग्र परिचालन दक्षता को बढ़ाती है और विभिन्न प्रकार के खतरों का सामना करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करती है. यह सुनिश्चित करती है कि सेना के पास हर स्थिति के लिए उपयुक्त प्रतिक्रिया बल उपलब्ध हो.गणतंत्र दिवस परेड में पहली उपस्थिति
इस वर्ष 26 जनवरी को भैरव बटालियन एक और ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनेगी. यह बटालियन पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेगी. इस अवसर पर, बटालियन के जवान कर्तव्य पथ पर मार्च करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सलामी देते हुए नज़र आएंगे और यह उनकी सार्वजनिक शुरुआत होगी और देश को उनकी क्षमताओं और समर्पण का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलेगा. यह परेड न केवल बटालियन के लिए गौरव का क्षण होगा,. बल्कि भारतीय सेना की बढ़ती शक्ति और आधुनिकीकरण का भी प्रतीक होगा.#ArmyDay 2026
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) January 13, 2026
02 Days to Go…#Bhairav
This Army Day, witness the troops of the newly raised #Bhairav Battalions in action for the first time.
Stay tuned for a day that celebrates pride, honours sacrifice and showcases India’s journey towards a stronger, future-ready India.… pic.twitter.com/efzaLMIv8k
