AI समिट प्रोटेस्ट केस: यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को मिली जमानत

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन मामले में भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब को जमानत दे दी है। कोर्ट ने ₹50,000 के निजी मुचलके पर यह राहत प्रदान की और दिल्ली पुलिस की रिमांड बढ़ाने की याचिका खारिज कर दी।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भारत मंडपम में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को बड़ी राहत दी है। शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने चिब को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चिब की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने अपर्याप्त आधारों के चलते स्वीकार नहीं किया।

अदालत की कार्यवाही और जमानत की शर्तें

पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने उदय भानु चिब को ₹50,000 के निजी मुचलके पर जमानत प्रदान की है। जमानत देते समय अदालत ने कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। आदेश के अनुसार, उदय भानु चिब को अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा ताकि वे बिना अनुमति देश से बाहर न जा सकें। इसके अतिरिक्त, अदालत ने उन्हें अपने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, जिनमें मोबाइल फोन और अन्य उपकरण शामिल हो सकते हैं, जांच एजेंसी के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया है। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि हिरासत में पूछताछ की अब कोई आवश्यकता नहीं है और चिब जांच में पूर्ण सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

दिल्ली पुलिस की रिमांड याचिका हुई खारिज

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उदय भानु चिब की पुलिस कस्टडी रिमांड को 7-दिन और बढ़ाने के लिए एक अर्जी दाखिल की थी। पुलिस का तर्क था कि मामले की गहराई से जांच करने और अन्य कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपी की हिरासत आवश्यक है। पुलिस ने मामले के दो अन्य आरोपियों की रिमांड के लिए भी अलग-अलग आवेदन दिए थे। हालांकि, ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने पुलिस की दलीलों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि क्राइम ब्रांच रिमांड बढ़ाने की आवश्यकता के संबंध में पर्याप्त और ठोस कारण पेश करने में विफल रही है। इसी आधार पर पुलिस की याचिका को खारिज करते हुए चिब की जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया गया।

भारत मंडपम में विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए हंगामे से जुड़ा है। भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने समिट के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस होकर विरोध जताया, जिससे वहां सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और दिल्ली पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसी कार्रवाई के तहत उदय भानु चिब और कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।

कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव

इस गिरफ्तारी के बाद से ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी। कांग्रेस पार्टी ने उदय भानु चिब की गिरफ्तारी को पूरी तरह से 'असंवैधानिक' करार दिया था। कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी बयान में कहा गया कि संविधान ने हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार दिया है और सरकार विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग कर रही है और दूसरी ओर, भाजपा ने इस विरोध प्रदर्शन के तरीके की कड़ी आलोचना की थी। भाजपा नेताओं का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के समिट के दौरान इस तरह का आचरण देश की छवि को प्रभावित करता है और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई अनिवार्य है।

कानूनी प्रक्रिया और आगामी जांच का दायरा

जमानत मिलने के बाद अब उदय भानु चिब जेल से बाहर आ सकेंगे, लेकिन जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले में अन्य साक्ष्यों को जुटाने और प्रदर्शन के पीछे की योजना की जांच करने में जुटी है और कोर्ट द्वारा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सरेंडर करने के आदेश का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। फिलहाल, कांग्रेस खेमे ने इस अदालती फैसले को अपनी नैतिक जीत बताया है, जबकि पुलिस अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है कि क्या इस जमानत आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाए या नहीं।